भगवान शिव ने क्यों धारण किया था काल भैरव का रौद्र रूप? पढ़ें शिव पुराण का ये रहस्य
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने भगवान ब्रह्मा जी के अहंकार बढ़ने पर काल भैरव का रौद्र रूप धारण किया था। आइए पढ़ते हैं काल भैरव की उत्पत्ति की कथा। ...और पढ़ें

शिव जी को बनना पड़ा कालभैरव? (AI-Generated Image)
HighLights
भगवान शिव ने ब्रह्मा के अहंकार पर काल भैरव रूप लिया
काल भैरव ने ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति हेतु तीर्थ यात्रा की
काशी में साधना कर काल भैरव बने काशी के रक्षक
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव शांत और सौम्य हैं, लेकिन कभी जरूरत पड़ने पर भी उनका स्वरूप बेहद भयंकर हो जाता है। शिव पुराण में बताया गया है कि जब पृथ्वी पर अहंकार बढ़ा है, तो भगवान शिव ने रौद्र रूप धारण किया है। इन्हीं में से एक अत्यंत उग्र अवतार है काल भैरव।
अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर किस कारण भगवान शिव को इतना उग्र रूप धारण करना पड़ा, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसकी वजह के बारे में विस्तार से।
कालभैरव के रूप से जुड़ी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ रचनाकार कौन है? इसको लेकर वार्ता हुई। इस दौरान ब्रह्मा जी ने स्वयं को सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ रचनाकार बताया, लेकिन इसके बाद भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु ऋषि-मुनियों के पास पहुंचे। उन्होंने कहा कि भगवान शिव सृष्टि के सर्वश्रेष्ठ रचनाकार हैं।
ऋषि-मुनियों की बात को सुनकर भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु हंसने लगे। भगवान ब्रह्मा को भगवान शिव से ईर्ष्या होने लगी। उन्होंने अहंकार और क्रोध में आकर भगवान शिव को अपशब्द कह दिए। भगवान ब्रह्मा के इस व्यवहार को देख महादेव क्रोधित हुए। वहीं, ब्रह्मा जी के द्वारा किए महादेव का अपमान हुआ। ऐसे में महादेव ने रौद्र रूप धारण किया। इसी रौद्र रूप से काल भैरव की उत्पत्ति हुई। इसके बाद भगवान ब्रह्मा जी के अहंकार को कम करने के लिए काल भैरव ने उनका पांचवां सिर काट दिया, जिससे उनको ब्रह्म हत्या का पाप लग गया।
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काल भैरव ने की तीर्थ यात्रा
ऐसे में महादेव ने काल भैरव से कहा कि आपको ब्रह्म हत्या के पाप से छुटकारा पाने के लिए तीर्थ यात्रा करनी होगी। भगवान शिव के आदेश पर काल भैरव ने तीर्थ यात्रा की शुरुआत। यात्रा के आखिरी में काल भैरव काशी पहुंचे। यहां पर काल भैरव ने साधना और सत्य ज्ञान की प्राप्ति की। इससे उनको ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली। जब शिव जी ने काल भैरव को काशी में देखा, तो वे काशी में प्रकट हुए और उन्हें काशी का रक्षक बनाया।
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शिव पुराण में मिलता है वर्णन
भगवान शिव के कालभैरव रूप धारण करने की कथा का वर्णन शिव पुराण में देखने को मिलती है।
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