बेहद खूंखार थे महाभारत के 4 अस्त्र? नाम सुनते ही कुरुक्षेत्र के मैदान में मच जाता था हाहाकार!
महाभारत युद्ध में प्रयोग किए गए कुछ अत्यंत विनाशकारी दिव्यास्त्रों का वर्णन किया गया है। इनमें सुदर्शन चक्र, नारायणास्त्र और पाशुपतास्त्र प्रमुख हैं, ...और पढ़ें
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महाभारत के 4 सबसे भयंकर दिव्यास्त्र! (AI-Generated Image)
HighLights
सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का प्रतीक, श्रीकृष्ण के पास था
नारायणास्त्र को कोई नहीं रोक सकता था, अश्वत्थामा ने चलाया
पाशुपतास्त्र शिव का अस्त्र, अर्जुन ने भगवान शिव से प्राप्त किया
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत का युद्ध धर्म और अधर्म के बीच लड़ा गया था। इस महायुद्ध में ऐसे में दिव्यास्त्रों का प्रयोग किया था, जो बेहद विनाशकारी थे। महाभारत के अस्त्र देवी-देवताओं के वरदान से प्राप्त हुए थे और उन्हें मंत्रों के जरिए जाग्रत किया जाता था।
महाभारत के युद्ध में जब कोई इन अस्त्रों का नाम लेता था, तो हर कोई डर जाता था। ये वो अस्त्र थे, जिनके सामने कोई भी कवच काम नहीं आता था। तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे महाभारत के 4 ऐसे अस्त्रों के बारे में, जिनका नाम सुनते ही बड़े-बड़े महारथी डरते थे।
सुदर्शन चक्र
इसे ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली चक्र माना जाता है। इसे जगत के पालनहार भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। सुदर्शन चक्र की गति अधिक तेज थी। महाभारत के समय यह चक्र भगवान श्रीकृष्ण के पास था। इस चक्र के बीच में आने वाली कोई भी चीज इसे रोक नहीं पाती थी। भगवान कृष्ण को सुदर्शन चक्र भगवान परशुराम ने भेंट किया था।
नारायणास्त्र
महाभारत में नारायणास्त्र भगवान विष्णु के पास था। इस अस्त्र को कोई भी नहीं रोक सकता था। बस एक उपाय था कि नारायणास्त्र के सामने समर्पण कर देना। गुरु द्रोणाचार्य के वध से गुस्से में आकर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने पांडवों की सेना पर नारायणास्त्र चलाया था। नारायणास्त्र बेहद शक्तिशाली था। इस अस्त्र का मुकाबला पूरे ब्रह्मांड में कोई भी नहीं कर सकता था।
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पाशुपतास्त्र
इस अस्त्र को चलाने के धर्म से जुड़े नियम का पालन करना जरूरी था। यह अस्त्र बेहद विनाशकारी था। पाशुपतास्त्र को कोई सामान्य व्यक्ति नहीं चला सकता था। इस अस्त्र में पूरे ब्रह्मांड को नष्ट करने की क्षमता थी। महाभारत काल में पाशुपतास्त्र को अर्जुन ने भगवान शिव से प्राप्त किया था। इसे शिव जी का शक्तिशाली अस्त्र माना जाता है।
महाभारत में अस्त्रों का है उल्लेख
सुदर्शन चक्र का वर्णन महाभारत के आदि पर्व और सभा पर्व में है। नारायणास्त्र का उल्लेख महाभारत के द्रोण पर्व में है। इसके अलावा पाशुपतास्त्र का वर्णन वन पर्व में है। वासवी शक्ति का वर्णन महाभारत के वन पर्व के कुण्डलाहरण पर्व में है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास