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    बाकी 4 पांडवों को जीवनदान देकर भी सिर्फ अर्जुन के प्राण क्यों लेना चाहता था सूर्यपुत्र कर्ण?

    Updated: Wed, 20 May 2026 12:47 PM (GMT+05:30)

    पांचों पांडवों में से कर्ण सबसे अधिक नफरत अर्जुन से ही करता था, लेकिन क्या आप इसका कारण जानते हैं। ...और पढ़ें

    भाई होते हुए भी कर्ण अर्जुन से क्यों करता था इतनी नफरत? (Picture Credit- AI Generated)

    भाई होते हुए भी कर्ण अर्जुन से क्यों करता था इतनी नफरत? (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. कर्ण अर्जुन को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता था

    2. कुंती को वचन दिया था, केवल अर्जुन को ही मारुंगा

    3. द्रौपदी द्वारा किए अपमान का बदला लेना चाहता था कर्ण

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत में ऐसे कई प्रसंग मिलते हैं, जो पाठकों को चकित कर देते हैं। पांचों पांडवों का भाई होते हुए भी कर्ण को हमेशा तिरस्कार का सामना करना पड़ा। ऐसे में जब उसे दुर्योधन ने मान-सम्मान दिया तो वह उसका ऋणी (कर्जदार) हो गया।

    यही कारण है कि गलत होते हुए भी कर्ण ने हमेशा दुर्योधन का ही साथ दिया। इन सब के बीच कर्ण हमेशा अर्जुन को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता रहा, जिसके महाभारत में कई कारण मिलते हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में।

    कुंती को दिया था यह वचन

    महाभारत में वर्णित एक प्रसंग के अनुसार, जब कुंती कर्ण को यह सच्चाई बताती है कि कर्ण उसी का पुत्र है और पांडवों का ज्येष्ठ भ्राता (बड़ा भाई) है, तो वह उससे यह वचन लेती है कि वह रणभूमि में अपने भाइयों का खून न बहाए।

    तब कर्ण, अपनी माता कुंती को यह आश्वासन देता है कि वह युद्ध में 4 पांडवों यानी युधिष्ठिर, भीम, नकुल और सहदेव को नहीं मारेगा, लेकिन अर्जुन उसी के हाथों से मारा जाएगा। अततः वह यह सुनिश्चित करता है कि युद्ध के अंत में कुंती के पांच पुत्र जीवित रहेंगे, लेकिन उसमें से एक या तो कर्ण होगा या फिर अर्जुन।

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    (Picture Credit- AI Generated)

    कर्ण की नफरत का कारण

    महाभारत ग्रंथ में कर्ण का वर्णन एक महान योद्धा के रूप में किया गया है, लेकिन कर्ण के मुकाबले अर्जुन को ही सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर की उपाधि दी गई थी। ऐसे में कर्ण द्वारा अर्जुन को ही अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानने का एक कारण यह भी था कि वह अपनी धनुर्विद्या की श्रेष्ठता साबित करना चाहता था।

    इसके अलावा, कर्ण अपने मित्र दुर्योधन की जीत सुनिश्चित करना चाहता था, जिसके लिए पांडवों की सबसे बड़ी ताकत यानी अर्जुन को नष्ट करना जरूरी था। इसलिए भी वह अर्जुन को अपना सबसे बड़ा शत्रु मानता था। 

    Mahabharat ai

    यह भी था एक कारण

    जब द्रौपदी का स्वयंवर हो रहा था, तो कर्ण ने भी उसमें भाग लिया था। लेकिन द्रौपदी ने 'सूतपुत्र' कहकर कर्ण का अपमान किया गया और अर्जुन को अपना पति चुना। यह घटना भी अर्जुन के प्रति कर्ण की ईर्ष्या और नफरत का एक कारण बन गई।

    जब महाभारत की युद्ध में अर्जुन और कर्ण का आमना-सामना हुआ तो उन दोनों के बीच महामुकाबला हुआ। दोनों एक-दूसरे पर भारी पड़ते हुए एक-दूसरे के तीरों को बाणों को काट रहे थे। लेकिन अंत में अर्जुन के हाथों कर्ण की मृत्यु हो गई।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।