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रामायण और महाभारत के वो भाई, जो एक-दूसरे के खून के प्यासे बन गए! क्या थी असली वजह?

Published: Sun, 17 May 2026 06:45 PM (GMT+05:30)

पौराणिक कथाओं में भाइयों के बीच हुए प्रसिद्ध संघर्षों जैसे सुग्रीव-बाली। आइए जानते हैं 4 ऐसे भाइयों के बारे में जो बाद में कट्टर दुश्मन बन गए थे।

पौराणिक काल के 4 सबसे बड़े भाई विवाद (AI Generated Image)

पौराणिक काल के 4 सबसे बड़े भाई विवाद (AI Generated Image) 

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भाई का रिश्ता दुनिया में सबसे मजबूत और भरोसेमंद रिश्ता माना जाता है। बुरा समय आने पर भाई ही दूसरे भाई की मदद करता है। लेकिन हमारे पौराणिक धर्म ग्रंथों में यह भी देखने को मिलता है कि, कैसे दो भाई एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए।

ऐसा ही नजारा हमें रामायण काल में सुग्रीव और बाली के बीच देखने को मिला था। आइए जानते हैं उन प्रमुख भाइयों की जोड़ी के बारे में जो एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए थे।

सुग्रीव और बाली

भाइयों के बीच संघर्षों का सबसे चर्चित उदाहरण सुग्रीव और बाली का माना जाता है। रामायण के अनुसार, एक गलतफहमी और सत्ता विवाद की वजह से दोनों भाई एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए थे।

बाली को लगा कि सुग्रीव ने विश्वासघात करके सारा राजपाठ अपने शासन में कर लिया था। बाद में भगवान राम की सहायता से बाली का वध हुआ था।

रावण और विभीषण

रामचरितमानस और रामायण में उल्लेख पौराणिक कहानी के मुताबिक, विभीषण ने कई बार रावण को माता सीता को श्रीराम को लौटाने की सलाह दी, लेकिन रावण ने अपने अंहकार के सामने उसकी एक बात नहीं सुनी।

आखिर में विभीषण ने रावण का पक्ष छोड़ भगवान राम का हाथ थाम लिया। जिसके बाद आखिर में रावण भी मृत्यु को प्राप्त हुआ।

पौराणिक भाई बनाम भाई  (1)

(AI Generated Image) 

कौरव और पांडव

महाभारत में कौरव और पांडव का संघर्ष काफी प्रचलित है। दुर्योधन की हठधर्मी, ईर्ष्या और अहंकार ने उसे भी मृत्यु लोक पहुंचा दिया।

दुर्योधन पांडवों से हमेशा द्वेष रखता था और कई बार उन्हें मारने की कोशिश भी की, आखिर में महाभारत के साथ दुर्योधन का भी अंत हो गया।

कुबेर और रावण

काफी कम लोगों को इस बात की जानकारी होगी कि, धन के देवता कुबेर और रावण सौतेले भाई थे। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण ने अपने बल के दम पर कुबेर से पुष्पक विमान और लंका पर अधिकार कर लिया था, जो पहले कुबेर के अधीन मानी जाती थी। यह सत्ता और लालच से जुड़ा संघर्ष माना जाता है।

पौराणिक ग्रंथों में भाई-भाई के संघर्ष को सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं कहा गया है, बल्कि इसे अहंकार, जलन, सत्ता, अधर्म और कर्मों का परिणाम से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि, इन कथाओं को आज केवल कहानी के रूप में ही नहीं, बल्कि संदेश के रूप में भी पढ़ा जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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