Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Mahashivratri 2026: पार्वती को अर्धांगिनी बनाने से पहले शिवजी ने क्यों बदला था रूप? जानें पौराणिक कथा

    Updated: Wed, 04 Feb 2026 03:00 PM (IST)

    Mahashivratri 2026: क्या आप जानते हैं कि विवाह से पहले भगवान शिव ने माता पार्वती की कड़ी परीक्षा ली थी? पढ़ें उस अनोखी पौराणिक कथा के बारे में जब शिव ...और पढ़ें

    पौराणिक कथा (Image Source: AI-Generated)

    पौराणिक कथा (Image Source: AI-Generated)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का पर्व केवल उपवास और पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह उस अटूट प्रेम और तपस्या का उत्सव है, जिसके बल पर माता पार्वती ने देवाधिदेव महादेव को प्राप्त किया था। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि विवाह के मंडप तक पहुंचने से पहले पार्वती जी को एक ऐसी परीक्षा से गुजरना पड़ा था, जहां खुद उनके आराध्य ही उनके विपक्ष में खड़े हो गए थे?

    तपस्या की पराकाष्ठा और महादेव का संशय

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हजारों सालों तक कठिन तपस्या की थी। उनकी भक्ति इतनी प्रबल थी कि तीनों लोक डोलने लगे। शिव पुराण (रुद्र संहिता - पार्वती खंड) के अनुसार, महादेव पार्वती जी की भक्ति से प्रसन्न तो थे, लेकिन वे यह भी देखना चाहते थे कि क्या पार्वती का प्रेम केवल उनके ऐश्वर्य के प्रति है या वे उनके 'अघोर' और 'फकीर' रूप को भी स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।

    ब्राह्मण का वेश और शिव की निंदा

    तपस्या के अंतिम चरण में, भगवान शिव ने एक वृद्ध ब्राह्मण का वेश धारण किया और उस जगह पर पहुंचे जहां पार्वती तप कर रही थीं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, उस ब्राह्मण ने पार्वती जी से उनकी कठिन तपस्या का कारण पूछा। जब पार्वती जी ने बताया कि वे शिव से विवाह करना चाहती हैं, तो ब्राह्मण जोर-जोर से हंसने लगा।

    उस ब्राह्मण (वेशधारी शिव) ने कहा, "तुम उस 'भस्मधारी' से विवाह करना चाहती हो जो श्मशान में रहता है, गले में सांप लपेटता है और जिसका न कोई कुल है, न घर? वह तो अमंगल का प्रतीक है। उससे अच्छा तो तुम किसी सुंदर राजकुमार या देवराज इंद्र से विवाह कर लो।" ब्राह्मण ने यहां तक कह दिया कि शिव के साथ तुम्हारा जीवन केवल दुखों से भरा होगा।

    खबरें और भी

    Shiv shakti

    (Image Source: Freepik)

    पार्वती का अडिग जवाब और जीत

    अपने आराध्य की निंदा सुनकर माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हो गईं। उन्होंने ब्राह्मण से कहा, "तुम शिव को केवल अपनी भौतिक आंखों से देख रहे हो, उनकी दिव्यता को नहीं जानते। मेरे लिए शिव ही पूर्ण सत्य हैं और अगर वे मुझे नहीं मिले, तो मैं अपना जीवन समाप्त कर लूंगी, लेकिन किसी और का विचार कभी मन में नहीं लाऊंगी।"

    पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, जैसे ही पार्वती जी ने ब्राह्मण को वहां से जाने को कहा, महादेव अपने असली स्वरूप में प्रकट हो गए। वे पार्वती के इस अडिग विश्वास और प्रेम को देखकर भावविभोर हो गए और उन्होंने उसी क्षण उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लिया।

    यह भी पढ़ें- माघ का महीना बीता, कल्पवास खत्म फिर भी मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं का लगा है तांता, मन में संगम स्नान की लालसा

    यह भी पढ़ें- Mahashivratri 2026: कैसे हुआ शिव-शक्ति का मिलन? पढ़ें अटूट प्रेम और कठोर तप की कथा

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।