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    Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर इस 'अमृत मुहूर्त' में करें भगवान शिव का अभिषेक, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति

    Updated: Sun, 11 Jan 2026 03:47 PM (GMT+05:30)

    गरुड़ पुराण में वर्णित है कि मकर संक्रांति के दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से तीन पीढ़ी के पूर्वजों को मृत्यु लोक से मुक्ति मिलती है। साथ ही साधक ...और पढ़ें

    Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व  (AI Generated Image)

    Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व  (AI Generated Image)

    HighLights

    1. सनातन धर्म में मकर संक्रांति का खास महत्व है।

    2. यह पर्व आत्मा के कारक सूर्य देव को समर्पित होता है।

    3. सूर्य देव की पूजा करने से आरोग्यता मिलता है। 

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Makar Sankranti 2026: वैदिक पंचांग के अनुसार, बुधवार 14 जनवरी को मकर संक्रांति है। यह दिन बेहद खास होता है। इस शुभ अवसर पर गंगा स्नान कर भक्ति भाव से देवी मां गंगा, भगवान शिव, विष्णु जी और सूर्य देव की पूजा की जाती है। संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है।

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    ज्योतिषियों की मानें तो मकर संक्रांति के दिन कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इनमें शिववास योग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। इस अमृत मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा और अभिषेक करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलेगी। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं।

    शुभ समय

    ज्योतिषियों की मानें तो मकर संक्रांति के दिन शिववास योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। शिववास योग का संयोग सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक है। इस दौरान भगवान शिव दिन भर कैलाश पर विराजमान रहेंगे। साधक मकर संक्रांति के दिन शिववास योग में भगवान शिव की पूजा और अभिषेक कर सकते हैं। इसके साथ ही मकर संक्रांति के दिन सुकर्मा योग का भी शुभ संयोग है। सुकर्मा योग का संयोग शाम 05 बजकर 27 मिनट तक है।


    ऐसे करें अभिषेक

    सनातन शास्त्रों में निहित है कि गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। भगवान शिव महज जलाभिषेक से प्रसन्न होते हैं। अपनी कृपा साधक पर बरसाते हैं। वहीं, पितरों को प्रसन्न करने और उनकी भटकती आत्मा को मोक्ष दिलाने के लिए मकर संक्रांति के दिन शिववास योग में काले तिल मिश्रित गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करें। इस उपाय को करने से साधक को पितृ की कुदृष्टि से मुक्ति मिलेगी।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।