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    Makar Sankranti 2026: 14 या 15 जनवरी कब खाई जाएगी खिचड़ी? नोट करें डेट और शुभ मुहूर्त

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 01:00 PM (IST)

    मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) का पर्व बेहद पावन माना जाता है। इसे खिचड़ी भी कहते हैं। इस शुभ अवसर पर सुबह स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर खिच ...और पढ़ें

    Makar Sankranti 2026: खिचड़ी दान का महत्व।

    Makar Sankranti 2026: खिचड़ी दान का महत्व।

    HighLights

    1. हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक मकर संक्रांति का पर्व है

    2. इसे खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है

    3. यह दिन सूर्य देव को समर्पित है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक मकर संक्रांति का पर्व है। इसे खिचड़ी (Khichdi) के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में खिचड़ी की सही तारीख और शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों में थोड़ी कन्फ्यूजन है कि 14 जनवरी या 15 जनवरी कब खिचड़ी खाई जाएगी? पंचांग गणना के अनुसार, इस बार सूर्य गोचर किस समय हो रहा है और कब यह महापर्व (Makar Sankranti 2026) मनाया जाएगा आइए इस आर्टिकल में सबकुछ जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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    14 या 15 जनवरी कब है मकर संक्रांति? (Makar Sankranti 2026 Shubh Muhurat)

    पंचांग गणना के आधार पर 14 जनवरी के दिन सूर्य देव सुबह 09 बजकर 03 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर करेंगे। ऐसे में 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी।

    खिचड़ी खाने और दान करने का नियम (The Rule Of Eating And Donating Khichdi)

    मकर संक्रांति को 'खिचड़ी' भी कहा जाता है। इस दिन उत्तर भारत में विशेष रूप से दाल-चावल की खिचड़ी बनाई और दान की जाती है।

    • स्नान के बाद - 15 जनवरी की सुबह महा पुण्यकाल में स्नान करने के बाद सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद ही खिचड़ी का सेवन करना चाहिए।
    • दान की सामग्री - इस दिन काली उड़द की दाल, चावल, तिल, गुड़, कंबल और नए वस्त्रों का दान करना बहुत फलदायी होता है।

    मकर संक्रांति का महत्व (Makar Sankranti 2026 Significance)

    इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिससे देवताओं का दिन शुरू होता है और खरमास समाप्त हो जाता है। इसी दिन से सभी मांगलिक काम जैसे - शादी, मुंडन, गृह प्रवेश दोबारा से शुरू हो जाते हैं। 15 जनवरी 2026 को गुरुवार का दिन होने से यह पर्व सुख और समृद्धि के लिहाज से और भी शुभ हो गया है।

    पूजन मंत्र (Surya Pujan Mantra)

    • ॐ आदित्याय नमः॥
    • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा॥
    • ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:॥

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।