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    मलमास में बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए अपनाएं ये असरदार तरीका

    Updated: Thu, 21 May 2026 03:45 PM (IST)

    मलमास के दौरान बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, क्योंकि इस अवधि में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। ...और पढ़ें

    मलमास में बच्चों को बुरी नजर से कैसे बचाएं? (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 17 मई 2026, रविवार से मलमास की शुरुआत हो चुकी है, जो 15 जून तक रहने वाला है। मलमास जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल हिंदू कैलेंडर में करीब हर तीन साल में आने वाला एक अतिरिक्त तेरहवां महीना ही मलमास है।

    हिंदू धर्म में मलमास के दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। इस दौरान शादी, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर भी रोक लग जाती है।

    मलमास के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे बच्चों बुरी नजर लगने के साथ नेगेटिव एनर्जी परेशान कर सकती है। ऐसे में मलमास के दौरान अपने बच्चों को बुरी नजर से बचाव के लिए कुछ खास उपाय बताए गए हैं।

    मलमास में बच्चों को बुरी नजर से बचाने के उपाय

    मलमास में बच्चों को बुरी नजर से बचाने के उपाय

    बच्चों को काल टीका लगाना

    मलमास के दौरान बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए काले टीके का इस्तेमाल करना शुभ मान जाता है। इसलिए बच्चों को बाहर ले जाते हैं आंख या तो गर्दन के पास काला टीका जरूर लगाए।

    नींबू-मिर्च का इस्तेमाल

    मलमास में बच्चों को बुरी नजर से बचाव के लिए दूसरा उपाय नींबू-मिर्च से जुड़ा है। इस उपाय में आपको बच्चों के ऊपर से नींबू और हरी मिर्च को घुमाकर घर से दूर ले जाकर फेंक दें, ताकि उसपर किसी का पैर न लगे।

    नमक से उतारे

    बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए नमक से जुड़ा टोटका भी अच्छा माना जाता है। इसमें एक चुटकी नमक को बच्चे के सिर से 7 बार फेरकर उसे आग में जला दें। इससे बुरी नजर का असर खत्म हो जाता है।

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    ताबीज या काला धागा बांधना

    छोटे बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए काला धागा और ताबीज पहनाना पारंपरिक और काफी प्रसिद्ध उपाय है। मान्यताओं के मुताबिक यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के साथ बच्चों को सुरक्षित वातावरण रख सकते हैं।

    हनुमान चालीसा का पाठ

    मलमास के दौरान रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होने के साथ पॉजिटिव एनर्जी में वृद्धि होती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।