रावण की मृत्यु के बाद मंदोदरी ने विभीषण को क्यों चुना? लंका के इतिहास का सबसे बड़ा राज
रावण वध के बाद लंका की महारानी मंदोदरी ने अपने ही देवर विभीषण को पति के रूप में क्यों चुना? आइए यहां जानते हैं। ...और पढ़ें

रामायण का वो सच जो छुपा रह गया।
HighLights
रावण की मृत्यु के बाद मंदोदरी ने एकांतवास चुन लिया था
लंका में स्थिरता के लिए श्रीराम ने विभीषण को एक खास सुक्षाव दिया था
लंका की प्रजा को विनाश से बचाने के लिए मंदोदरी ने विभीषण से शादी की
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दशहरे के दिन रावण वध की कहानी तो हर कोई जानता है, लेकिन युद्ध समाप्त होने के बाद लंका के राजमहल में क्या हुआ, यह आज भी एक बहुत बड़ा रहस्य है। रावण की मृत्यु के बाद लंका पूरी तरह अनाथ और तबाह हो चुकी थी। ऐसे में लंका की महारानी मंदोदरी के सामने न केवल अपने पति और पुत्रों को खोने का बड़ा दुख था, बल्कि लंका के भविष्य की एक बेहद डरावनी तस्वीर भी थी।
रामचरितमानस के अनुसार, रावण के वध के बाद विभीषण का लंका के राजा के रूप में राज्याभिषेक तो कर दिया गया, लेकिन मंदोदरी ने विभीषण को अपने नए जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। आखिर एक पतिव्रता स्त्री ने ऐसा कठोर फैसला क्यों लिया? आइए इसके पीछे के तीन सबसे बड़े कारण जानते हैं।

श्रीराम का सुक्षाव
युद्ध समाप्त होने के बाद लंका की प्रजा विभीषण को आसानी से राजा मानने को तैयार नहीं थी, क्योंकि प्रजा की नजरों में विभीषण कुलद्रोही थे जो शत्रु के साथ मिले हुए थे। ऐसे में विद्रोह की पूरी आशंका थी। तब भगवान श्रीराम ने विभीषण को सुझाव दिया कि लंका की सत्ता को स्थिरता देने और प्रजा का विश्वास जीतने के लिए उन्हें महारानी मंदोदरी से विवाह कर लेना चाहिए।
लंका का पुनर्निर्माण और प्रजा की सुरक्षा
शुरुआत में मंदोदरी इस प्रस्ताव के लिए तैयार नहीं थीं और उन्होंने एकांतवास चुन लिया था। लेकिन जब उन्होंने देखा कि बिना कुशल नेतृत्व के लंका की बची-कुची सेना और प्रजा आपस में लड़कर नष्ट हो जाएगी, तो उन्होंने लंका के हित में अपनी व्यक्तिगत भावनाओं का बलिदान दे दिया। मंदोदरी जानती थीं कि विभीषण धर्मात्मा हैं और उनके साथ मिलकर ही लंका को दोबारा सोने की नगरी बनाया जा सकता है।
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कुल की रक्षा का दायित्व
रावण के वंश के लगभग सभी पुरुष मारे जा चुके थे। राजकुल की अनगिनत विधवा स्त्रियां और अनाथ बच्चों को सुरक्षा की जरूरत थी। विभीषण से विवाह करके मंदोदरी ने उन सभी स्त्रियों को संरक्षण दिया और लंका के कुल को पूरी तरह समाप्त होने से बचा लिया।
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