चित्रगुप्त रखते हैं कर्मों का हिसाब; तो यमराज, श्रवण और श्रवणी दूत की क्या होती है भूमिका?
गरुड़ पुराण के अनुसार, यमलोक में यमराज, चित्रगुप्त, श्रवण दूत और श्रवणी दूत मिलकर व्यक्ति के कर्मों का हिसाब कैसे करते हैं? ...और पढ़ें

यमलोक में हमारे कर्मों का हिसाब कौन रखता है? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म के कई ग्रंथों में खासतौर से गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण और लोक-परंपराओं में अक्सर यह सुनने और पढ़ने को मिलता है कि, यमलोक में हर व्यक्ति के कर्म का लेखा-जोखा रखा जाता है। मरने के बाद जब आत्मा यमलोक पहुंचती है, तब यमराज द्वारा उसके अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर न्याय किया जाता है। इस व्यवस्था में केवल यमराज ही नहीं, बल्कि चित्रगुप्त, श्रवण दूत और श्रवणी दूत भी शामिल होते हैं।
हममें से ज्यादातर लोगों ने यमलोक के संबंध में सिर्फ यमराज और चित्रगुप्त का नाम ही सुना है, जबकि गरुड़ पुराण के प्रेतखंड अध्याय में श्रवण दूत और श्रवणी दूत का भी जिक्र देखने को मिलता है। आइए जानते हैं इसके बारे में।
कर्मों के न्यायाधीश यमराज
गरुड़ पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में यमराज को धर्मराज कहकर बुलाया जाता है। उनका काम सिर्फ मृत्यु देना नहीं है, बल्कि आत्माओं को उनके कर्मों के आधार पर न्याय प्रदान करना भी है। मौत के बाद जब जीवात्मा को यमलोक में पेश किया जाता है, तो यमराज उसके कर्मों की समीक्षा कर उसे स्वर्ग, नरक और न्याय करते हैं।
चित्र गुप्त कर्मों के प्रमुख लेखाकार
स्कंद पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में चित्रगुप्त को भगवान ब्रह्मा की काया से उत्पन्न बताया जाता है। उनके पास सभी मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने का दायित्व सौंपा गया है। मान्यताओं के मुताबिक, व्यक्ति के हर अच्छे और बुरे कर्म का ब्यौरा चित्रगुप्त के पास सुरक्षित रहता है। जब आत्मा यमलोक की ओर प्रस्थान करती है, तब चित्र गुप्त यमराज के सामने उसका पूरा रिकॉर्ड पेश करते हैं।
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श्रवण दूत कौन हैं?
गरुड़ पुराण के प्रेत खंड अध्याय में बताया गया है कि, श्रवण दूतों का कार्य पृथ्वी पर मनुष्य के कार्यों का निरीक्षण करना है। ये मनुष्य द्वारा किए जाने वाले कार्य, व्यवहार और आचरण को देखते हैं तथा उसकी संपूर्ण जानकारी चित्रगुप्त तक पहुंचाते हैं। इन्हें यमराज की सूचना प्रणाली भी कहा जाता है।
श्रवणी दूत कौन हैं?
श्रवणी दूतों को श्रवण दूतों की स्त्री शक्ति या सहयोगी रूप माना जाता है। लोक मान्यताओं के मुताबिक, वे खासतौर से मनुष्य के निजी आचरण, वाणी और गुप्त कर्मों की साक्षी रहती हैं। हालांकि श्रवणी दूतों का उल्लेख गरुड़ पुराण पर आधारित कथाओं और धार्मिक व्याख्याओं में ही देखने को मिलता है।
मनुष्यों के कर्मों का हिसाब कैसे होता है?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक व्यक्ति जीवनभर अच्छे और बुरे दोनों तरह के कर्म करता है। श्रवण और श्रवणी दूत उन कर्मों के साक्षी बनते हैं। इसके बाद कर्मों का विवरण चित्रगुप्त के पास पहुंचता है, जहां वे उनका लेखा-जोखा तैयार करते हैं। मौत के बाद जब आत्मा यमलोक पहुंचती है, तो चित्रगुप्त उन कर्मों का विवरण पेश करते हैं। इसके बाद यमराज धर्म और न्याय के आधार पर आखिरी निर्णय सुनाते हैं।
यमलोक न्याय व्यवस्था का शास्त्रीय आधार?
गरुड़ पुराण में यमराज, चित्रगुप्त, यमदूत और कर्म के आधार पर न्याय का विस्तृत वर्णन मिलता है। चित्रगुप्त को कर्मों का लेखाकार तथा यमराज को अंतिम न्यायाधीश माना जाता है। वहीं श्रवण दूत और श्रवणी दूतों का जिक्र मुख्य रूप से गरुड़ पुराण की व्याख्यों और पौराणिक कथाओं में देखने को मिलता है।
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