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    सिर्फ शिव पुत्र नहीं, धरती के बेटे भी हैं मंगल देव, क्या है इन दोनों के बीच का गहरा कनेक्शन?

    Updated: Wed, 11 Mar 2026 11:24 AM (GMT+05:30)

    मंगल देव किसके पुत्र हैं और उनका जन्म कैसे हुआ? पढ़ें भगवान शिव के पसीने और पृथ्वी माता के वात्सल्य से जुड़ी मंगल देव (Bhumiputra) की यह पौराणिक कथा। ...और पढ़ें

    किसके पुत्र हैं मंगल देव? (Image Source: AI-Generated)

    किसके पुत्र हैं मंगल देव? (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेक्स, नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में मंगल देव (Mangaldev) को 'ग्रहों का सेनापति' कहा जाता है। वो साहस, ऊर्जा और शौर्य के प्रतीक हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि उग्र स्वभाव वाले इस देवता का जन्म कैसे हुआ?

    मंगल देव की उत्पत्ति की कथा जितनी रहस्यमयी है, उतनी ही रोचक भी। इन्हें 'भूमिपुत्र' क्यों कहा जाता है, इसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा है।

    शिव के पसीने से उत्पत्ति

    पौराणिक कथा के अनुसार, अंधकासुर नाम के एक शक्तिशाली दैत्य ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा। इसपर उसने वरदान मांगा कि "उसके रक्त की एक भी बूंद जहां गिरे, वहां उसी के समान सैकड़ों बलशाली असुर पैदा हो जाएं।" शिव जी ने उसे यह वरदान दे दिया।

    इस वरदान के अहंकार में अंधकासुर ने तीनों लोकों में तबाही मचा दी। ऋषि-मुनि और देवता, सभी उसके अत्याचार से त्राहि-त्राहि कर उठे और अंतत: महादेव की शरण में पहुंचे।

    महादेव का भीषण युद्ध और मंगल का जन्म

    सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव और अंधकासुर के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया। यह युद्ध इतना तीव्र था कि महादेव के मस्तक पर पसीने की बूंदें छलक आईं। जैसे ही शिव के पसीने की कुछ बूंदें तपी हुई धरती पर गिरीं, पृथ्वी दो भागों में फट गई। इसी अलौकिक घटना से एक अत्यंत तेजस्वी और लाल वर्ण वाले बालक का जन्म हुआ, जिन्हें हम मंगल देव के नाम से जानते हैं।

    mangal

    (Image Source: AI-Generated)

    रक्त का पान और 'भूमिपुत्र' की उपाधि

    जब महादेव ने अंधकासुर पर प्रहार किया, तो मंगल देव ने अपनी अद्भुत शक्ति का परिचय दिया। उन्होंने असुर के शरीर से गिरने वाली रक्त की एक-एक बूंद को धरती पर गिरने से पहले ही अपने भीतर समाहित कर लिया। इससे कोई नया असुर पैदा नहीं हो सका और अंधकासुर का अंत संभव हुआ।

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    चूंकि, मंगल का जन्म धरती के फटने से हुआ और उन्होंने असुर के रक्त को सोखकर पृथ्वी की रक्षा की, इसलिए उन्हें 'भूमिपुत्र' या 'भौम' कहा जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।