Masik Shivratri 2026: मार्च में किस दिन है मासिक शिवरात्रि? नोट करें शुभ मुहूर्त और संयोग
चैत्र नवरात्र के दौरान जगत की देवी मां दुर्गा की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त नवरात्र का व्रत रखा जाता है। ...और पढ़ें

Masik Shivratri 2026: मासिक शिवरात्रि का धार्मिक महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में चैत्र महीने का खास महत्व है। यह महीना जगत की देवी मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक चैत्र नवरात्र मनाया जाता है। इस अवधि में देवी मां दुर्गा की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही नौ दिनों तक मां दुर्गा और उनके रूपों की पूजा की जाती है।

चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। आइए, चैत्र माह की मासिक शिवरात्रि की तिथि और शुभ मुहूर्त जानते हैं-
चैत्र शिवरात्रि शुभ मुहूर्त (Masik Shivratri 2026 Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 मार्च को देर रात 01 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट पर चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि समाप्त होगी। मासिक शिवरात्रि के दिन निशा काल में शिव शक्ति की पूजा होती है। इसके लिए 11 मार्च को चैत्र महीने की मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। इस दिन निशा काल में पूजा का समय देर रात 12 बजकर 06 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक है।
मासिक शिवरात्रि शुभ योग (Masik Shivratri 2026 Shubh Yog)
ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। शिववास योग के दौरान भगवान शिव कैलाश पर देवी मां पार्वती के साथ विराजमान रहेंगे। इस दौरान देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा और शिव अभिषेक करने से साधक को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी।
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पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि के दिन सूर्योदय के समय उठें। इस समय भगवान शिव और मां पार्वती को प्रणाम कर दिन की शुरुआत करें। घर की साफ-सफाई करने के बाद स्नान-ध्यान करें। इसके बाद आचमन कर सफेद रंग के कपड़े पहनें। अब सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। इसके बाद पंचोपचार कर विधि-विधान और भक्ति भाव से भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें। इस समय भगवान शिव को फल, फूल और मिष्ठान अर्पित करें। पूजा के दौरान शिव चालीसा का पाठ और शिव मंत्रों का जप करें। पूजा का समापन शिव जी की आरती से करें। इस समय भगवान शिव से सुख और सौभाग्य में वृद्धि की कामना करें।
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