क्यों सूखी रहती है फल्गु नदी, कौए को क्यों मिला माता सीता का श्राप? आज भी गया की धरती पर दिखता है असर
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, माता सीता ने फल्गु नदी, गाय, कौआ, तुलसी और ब्राह्मण को श्राप दिया था। जानें क्या थी वो घटना और आज भी क्यों दिखता है इसका प् ...और पढ़ें

माता सीता के श्राप की कहानी (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण की कथाओं में अक्सर हमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के धैर्य और पराक्रम की कहानियां सुनने को मिलती हैं। लेकिन, इस महागाथा का एक बहुत ही रहस्यमयी हिस्सा माता सीता के 'श्राप' से भी जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वनवास के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने आज के समय में भी दिखने वाली कुछ चीजों की नियति बदल दी।
वायु पुराण (गया माहात्म्य) और रामायण प्रसंग के अनुसार, जब भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता वनवास पर थे, तब राजा दशरथ की मृत्यु का समाचार पाकर वे पितृ पक्ष (Pitru Paksha) के दौरान बिहार के गया पहुंचे। श्री राम और लक्ष्मण श्राद्ध की सामग्री जुटाने के लिए नगर की ओर गए थे। इधर, पिंड दान का शुभ मुहूर्त निकला जा रहा था। तभी राजा दशरथ की आत्मा ने प्रकट होकर माता सीता से पिंड दान की मांग की।
समय की कमी को देखते हुए माता सीता ने फल्गु नदी के किनारे बालू (रेत) से पिंड बनाए और वहां मौजूद पांच गवाहों- फल्गु नदी, एक गाय, एक कौआ, केतकी का फूल और वट वृक्ष को साक्षी मानकर पिंड दान कर दिया।
एक झूठ और जीवनभर का श्राप
जब श्री राम वापस आए, तो सीता जी ने उन्हें पूरी बात बताई। लेकिन, राम जी को विश्वास नहीं हुआ कि बिना सामग्री के पिंड दान कैसे हो सकता है। जब सीता जी ने उन पांचों गवाहों से सच्चाई बताने को कहा, तो श्री राम के डर से या किसी अन्य कारण से फल्गु नदी, गाय, कौआ, केतकी के फूल ने झूठ बोल दिया कि सीता जी ने कोई पिंड दान नहीं किया है। इनमें से सिर्फ वट वृक्ष ने ही सच का साथ दिया।
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खुद को झूठा साबित होते देख माता सीता अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गईं। उन्होंने उसी क्षण उन चारों को श्राप दे दिया, जिसका असर आज भी माना जाता है।
फल्गु नदी: इसे श्राप मिला कि यह सिर्फ नाम की नदी रहेगी और ऊपर से हमेशा सूखी रहेगी (आज भी यह नदी अंतःसलिला है, यानी पानी जमीन के नीचे बहता है)।
गाय: माता ने श्राप दिया कि गाय की पूजा तो होगी, लेकिन उसे हमेशा लोगों का जूठन ही खाना पड़ेगा।
कौआ: कौए को यह श्राप मिला कि अकेले खाने से कभी भी उसका पेट नहीं भरेगा और उसकी आकस्मिक मृत्यु ही होगी।
केतकी के फूल: केतकी के फूलों को श्राप मिला कि उसे किसी भी पूजा में शामिल नहीं किया जाएगा।
वट वृक्ष को मिला वरदान
इन सभी साक्षी में से केवल वटवृक्ष के सत्य बोला था। इसलिए माता सीता उससे प्रसन्न हुई और उसे यह वरदान दिया कि उसे लंबी आयु प्राप्त होगी। इसी के साथ, पतिव्रता स्त्री उनका स्मरण करके अपने पति के दीर्घायु की कामना करेंगी।
क्या कहते हैं शास्त्र?
हालांकि यह कहानी लोक कथाओं और क्षेत्रीय मान्यताओं में बहुत प्रसिद्ध है, लेकिन इसका मुख्य आधार 'वाल्मीकि रामायण' के कुछ प्रसंगों के साथ-साथ विशेष रूप से 'पद्म पुराण' में मिलता है। पद्म पुराण के सृष्टि खंड में गया तीर्थ के महत्व और माता सीता द्वारा किए गए इस पिंड दान का विस्तार से वर्णन है। आज भी गया जाने वाले श्रद्धालु इन मान्यताओं को अपनी आंखों से सच होते देखते हैं।
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