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    मौनी अमावस्या पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, पितरों को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा अवसर

    By Digital DeskEdited By: Suman Saini
    Updated: Fri, 16 Jan 2026 09:08 AM (GMT+05:30)

    शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन, संयम और श्रद्धा से किए गए धार्मिक कर्म कई गुना फल प्रदान करते हैं। इस दिन बनने वाले संयोग इसे साधन ...और पढ़ें

    मौनी अमावस्या के दिन बनने वाले शुभ योग (AI Generated Image)

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    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। सनातन परंपरा में मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) को आत्म शुद्धि, पितृ तर्पण और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा अत्यंत पावन पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। यह तिथि केवल अमावस्या मात्र नहीं, बल्कि विशेष ग्रह स्थितियों और काल संयोग के कारण दुर्लभ आध्यात्मिक योगों का निर्माण करती है।

    माघ मास और अमावस्या का विशेष संयोग

    मौनी अमावस्या माघ मास में पड़ती है, जिसे सनातन धर्म में पुण्य, तप और दान का श्रेष्ठ महीना माना गया है। माघ मास में अमावस्या का संयोग स्वयं में अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार माघ मास में किया गया स्नान, दान और तर्पण (pitru tarpana significance) कई जन्मों के पुण्य के समान फल देता है।

    अमावस्या तिथि पितरों से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए इस दिन पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व होता है। माघ मास की शुद्ध ऊर्जा और अमावस्या की तिथि मिलकर ऐसा योग बनाती है, जो साधक के भीतर संयम, श्रद्धा और आत्मिक शांति को मजबूत करता है। यही कारण है कि यह संयोग अत्यंत दुर्लभ माना गया है।

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    (Picture Credit: Freepik)

    उत्तरायण सूर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा

    मौनी अमावस्या 2026 (Mauni Amavasya 2026 date) मकर संक्रांति के बाद आती है, जब सूर्य उत्तरायण होते हैं। उत्तरायण को देवताओं का दिन और प्रकाश वृद्धि का काल माना गया है। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण सूर्य के समय किए गए धार्मिक कर्म विशेष रूप से फलदायी होते हैं। इस अवधि में सूर्य की ऊर्जा साधक के भीतर आत्मबल और सकारात्मकता का संचार करती है।

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    मौनी अमावस्या पर उत्तरायण सूर्य (Uttarayan and Magh Amavasya) का संयोग तप, जप और दान को कई गुना प्रभावशाली बनाता है। यही कारण है कि इस दिन गंगा स्नान, दान पुण्य और साधना का विशेष महत्व बताया गया है। उत्तरायण सूर्य और अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग आत्म शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

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    (Picture Credit: Freepik)

    मौन व्रत और पितृ तर्पण से बनने वाला विशेष योग

    मौनी अमावस्या का प्रमुख महत्व मौन व्रत और पितृ तर्पण से जुड़ा माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन मौन का पालन करने से मन, वाणी और विचारों की शुद्धि होती है। मौन व्रत व्यक्ति को आत्मचिंतन और संयम की ओर प्रेरित करता है। साथ ही अमावस्या तिथि पितरों से जुड़ी होने के कारण इस दिन तर्पण और दान करने का विशेष फल बताया गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर श्रद्धा से किया गया तर्पण पितरों को तृप्त करता है और पितृ दोष में कमी लाने में सहायक माना जाता है। मौन व्रत और पितृ कर्म का यह संयोग साधक के भीतर शांति, संतुलन और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करता है, जिससे यह दिन आत्मिक साधना के लिए विशेष बन जाता है।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।