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    सुबह या रात, 'ॐ असतो मा सद्गमय' मंत्र का जप कब करें? पढ़ें सही समय; नियम और मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 01:43 PM (IST)

    'ॐ असतो मा सद्गमय' मंत्र का जप करने का सही समय, नियम और विधि जानें। साथ ही इस मंत्र के जाप से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ पढ़ें। ...और पढ़ें

    'ॐ असतो मा सद्गमय' मंत्र जाप के लाभ। (Picture Credit- AI Generated)

    'ॐ असतो मा सद्गमय' मंत्र जाप के लाभ। (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 'ॐ असतो मा सद्गमय' बृहदारण्यक उपनिषद का एक प्रसिद्ध शांति मंत्र है। यह मंत्र एक तरह से ईश्वर की प्रार्थना है। इतना ही नहीं, यह मंत्र हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु के डर से निर्डता की ओर ले जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र का नियमित जाप मन को शांति, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। हालांकि, लोगों में इस बात को लेकर भ्रम है कि इस मंत्र का जाप सुबह या रात कब करना चाहिए । चलिए हम आपको बताते हैं कि इस मंत्र का वास्तविक अर्थ क्‍या है और इसे पढ़ने से क्‍या लाभ मिलते हैं।

    मंत्र

    असतो मा सद्गमय।

    तमसो मा ज्योतिर्गमय।

    मृत्योर्मा अमृतं गमय।

    ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

    मंत्र का सरल अर्थ

    इस मंत्र का अर्थ है: " हे प्रभु, मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलें। अज्ञान और अंधकार से ज्ञान और प्रकाश की ओर ले जाएं। मृत्यु के भय और दुख से निकालकर अमर ज्ञान तथा शांति की ओर ले जाएं। इस मंत्र के अंत में तीन बार "ॐ शान्तिः" बोलकर स्वयं के लिए, आसपास के वातावरण और समस्त संसार में शांति की कामना की जाती है।

    मंत्र जप का सबसे सही समय

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र का जप ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह लगभग 4 बजे से 6 बजे के बीच करना सबसे शुभ माना जाता है। इस समय वातावरण शांत रहता है और मन को एकाग्र रखना आसान होता है। उषा काल यानी सूर्योदय के बाद भी इसका जाप किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि सुबह किया गया मंत्र जाप पूरे दिन व्‍यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार और मानसिक शांति प्रदान करता है।

    यदि सुबह समय न मिल पाए तो शाम के समय या रात में सोने से पहले भी इस मंत्र का शांत मन से जाप किया जा सकता है। रात में इसका मानसिक जाप करने से दिनभर की थकान और तनाव कम हो जाता है और मन को शांति का अनुभव होता है, इससे नींद भी गहरी आती है।

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    मंत्र जप करने के नियम

    • इस मंत्र का जाप करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहन लें। रात के वक्‍त भी यदि आप इस मंत्र का जाप कर रहे हैं तो बिस्‍तर में बैठकर करने की जगह मंदिर के पास बैठकर करें और साफ कपड़े पहन लें।
    • इस मंत्र का जाप किसी साफ और शांत स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर करना चाहिए। कुछ क्षण गहरी सांस लेकर मन को शांत करें और फिर श्रद्धा के साथ मंत्र का उच्चारण करें।
    • आप अपनी सुविधा के अनुसार इस मंत्र का 3, 7, 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं। यदि संभव हो तो, मंत्र जाप के वक्‍त रुद्राक्ष या तुलसी की माला का भी उपयोग करें।
    • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मंत्र का उच्चारण स्पष्ट हो और मन पूरी तरह ईश्वर की प्रार्थना में लगा हो।

    मंत्र जप के आध्यात्मिक लाभ

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र का नियमित जाप व्यक्ति को सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।  इस मंत्र का शांत वातावरण में जाप करने से मन को सुकून मिलता है। एकाग्रता बढ़ाने के लिए सभी को इस मंत्र का जाप दिन में एक बार जरूर करना चाहिए। यदि आप नियमित इसका जाप करते हैं मानसिक तनाव कम हो जाता है।

    अत: 'ॐ असतो मा सद्गमय' केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, ज्ञान और प्रकाश की ओर ले जाने वाली एक प्रार्थना भी है।

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