क्या सच में मनुष्य का एक साल भगवान के एक दिन के बराबर होता है? पढ़ें कितने महीनों की होती है भगवान की रात और सुबह
जानिए सनातन धर्म और पद्म पुराण में वर्णित देवताओं की काल गणना, छह महीने के दिन और छह महीने की रात का रहस्य, साथ ही दिव्य वर्ष की रोचक जानकारी। ...और पढ़ें

छह महीने तक देवताओं की सुबह होती है। (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में समय की गणना केवल मनुष्यों के जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रह्मांड में रहने वाले देवी -देवताओं के स्तर पर भी इसका महत्व बताया गया है। पद्म पुराण के सृष्टि खंड के तीसरे अध्याय में बताया गया है कि मनुष्य का एक वर्ष देवताओं के एक पूरे दिन के बराबर होता है। पहली बार जब किसी को यह तथ्य पता चलता है, तो उसे यकीन नहीं होता है, मगर पद्म पुराण में इसकी पूरी गणना साफ-साफ बताई गई है। चलिए तो जानते हैं कि देवी-देवताओं के रात और सुबह का क्या रहस्य है।
क्या है देवताओं के एक दिन और रात का रहस्य?
सनातन धर्म की काल गणना के अनुसार, मनुष्य का एक पूरा वर्ष देवताओं के एक अहोरात्र यानी एक दिन और एक रात के समान माना जाता है। इस एक वर्ष को दो बराबर हिस्सों में बांटा गया है। पहले छह महीने देवताओं का दिन होता है और अगले छह महीने उनकी रात मानी जाती है। यह गणना सूर्य की गति पर निर्भर करती है, जिसे उत्तरायण और दक्षिणायन के नाम से जाना जाता है।
छह महीने का सुबह और छह महीने की रात
जब सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है, तब लगभग छह महीने तक देवताओं की सुबह कहलाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय शुभ कार्यों, यज्ञ, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
वहीं, जब सूर्य दक्षिणायन में रहता है, तब अगले छह महीने देवताओं की रात मानी जाती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि देवता पूरी तरह निष्क्रिय हो जाते हैं, बल्कि यह केवल एक धामिर्क गणना है। केवल चतुर्मास में चार महीनों के लिए धरती के पालनहार श्री हरि विष्णु भगवान योग निद्रा में चले जाते हैं।
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दिव्य वर्ष की गणना कैसे होती है?
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, मनुष्य के 360 दिन को मिलाकर 1 वर्ष बनता है और देवताओं का एक दिव्य दिन बनता है। यानी जिस तरह मनुष्य के लिए 360 दिन लगभग एक वर्ष माने जाते हैं, उसी प्रकार देवताओं के लिए 360 दिव्य सुबह-रात मिलकर उनका एक वर्ष बनाते हैं।
अत: इस गणना के आधार पर हर वर्ष जब चतुर्मास शुरू होता है, तो उसी के साथ देवताओं की रात भी शुरू हो जाती है।
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