वैशाख पूर्णिमा पर करें ये ज्योतिषीय उपाय, हर मनोकामना होगी पूरी
वैशाख पूर्णिमा, जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत शुभ मानी जाती है। ...और पढ़ें

Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा पर करें ये उपाय। (Ai Generated Image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। इसे वैशाख पूर्णिमा और बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ होता है, जिसका प्रभाव सीधे मनुष्य के मन और भाग्य पर पड़ता है। अगर आपके जीवन में लंबे समय से परेशानियां चल रही हैं या कोई मनोकामना अधूरी है, तो वैशाख पूर्णिमा की रात कुछ विशेष ज्योतिषीय उपाय जरूर करें, जो इस प्रकार हैं।

धन के लिए
पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। ऐसे में रात के समय एक लाल कपड़े में 11 कौड़ियां रखें और उन पर हल्दी का तिलक लगाएं। इन्हें मां लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें और अगले दिन अपनी तिजोरी में रख दें। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में धन में वृद्धि होती है और फिजूल खर्चों पर रोक लगती है।
चंद्रमा को अर्घ्य
जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष है या जो मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, उन्हें वैशाख पूर्णिमा की रात कच्चे दूध में गंगाजल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देते समय 'ॐ सों सोमाय नमः' मंत्र का जाप करें। यह उपाय न केवल मन को शांति प्रदान देता है, बल्कि व्यक्तित्व में आकर्षण भी बढ़ाता है।
पीपल की पूजा
वैशाख पूर्णिमा पर पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। इस दिन सुबह के समय पीपल की जड़ में जल अर्पित करें और शाम के समय घी का दीपक जलाएं। इससे पितृ दोष शांत होता है और परिवार में चल रहे कलह से मुक्ति मिलती है।
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तुलसी के सामने जलाएं दीपक
शाम के समय तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का दीपक जलाएं और 11 बार परिक्रमा करें। तुलसी की कृपा से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा अंधविश्वास के खिलाफ है।