Pradosh Vrat 2026: शाम को शिव पूजन के बाद जरूर करें इस कथा का पाठ, मिलेगा व्रत का हजार गुना फल
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है और हर महीने की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस व्रत की पूर्णता के लिए इसकी कथा (Pradosh Vrat Katha) का पाठ जरूर करना ...और पढ़ें

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत कथा का पाठ।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है और हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक कि प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2026) की कथा का पाठ न किया जाए। इस साल यह पावन व्रत आज यानी 30 जनवरी 2026 को किया जा रहा है, तो आइए प्रदोष व्रत कथा का पाठ करते हैं, जो इस प्रकार हैं -
प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा (Pradosh Vrat Katha)
-1769748265372.jpg)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है एक गरीब ब्राह्मणी अपने पति की मृत्यु के बाद बहुत दरिद्र हो गई थी। वह अपने पुत्र के साथ भिक्षा मांगकर अपना जीवन व्यतीत करती थी। एक दिन भिक्षा मांगकर लौटते समय उसे विदर्भ देश का राजकुमार मिला, जो अपने पिता के राज्य से निकाल दिए गए थे। ब्राह्मणी ने उस राजकुमार को अपने साथ घर ले आई और उसे अपने पुत्र के समान पालने लगी। एक दिन वह ब्राह्मणी अपने पुत्रों के साथ प्रदोष व्रत कर रही थी और शिव मंदिर गई।
वहां उसे शांडिल्य ऋषि मिले। ऋषि ने ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत की महिमा और शिव पूजन की विधि बताई। ब्राह्मणी ने पूरी निष्ठा के साथ ऋषि के बताए अनुसार व्रत और कथा का पाठ किया। कुछ समय बाद, वह राजकुमार गंधर्व कन्याओं के साथ खेल रहा था, तभी उसकी मुलाकात गंधर्व राजकुमारी अंशुमती से हुई। वे दोनों एक-दूसरे पर मोहित हो गए।
अंशुमती के पिता को जब पता चला कि वह विदर्भ का राजकुमार है, तो उन्होंने उन दोनों का विवाह कर दिया। इसके बाद राजकुमार ने गंधर्व सेना की मदद से अपने पिता का खोया हुआ राज्य वापस पा लिया। राजकुमार ने ब्राह्मणी और उसके पुत्र को अपने महल में बुलाया और उनको खूब सारा धन देकर उनकी दरिद्रता दूर की।
खबरें और भी
ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के प्रभाव से ही राजकुमार को उसका राज्य मिला और ब्राह्मणी के पुत्र को भी सुख-सुविधाएं प्राप्त हुईं। तब से यह मान्यता चली आ रही है कि जो भी व्यक्ति प्रदोष व्रत की यह कथा पढ़ता है, उसके जीवन से दरिद्रता और दुखों का नाश होता है।
कथा के बाद करें ये काम
कथा के समापन के बाद भगवान शिव की आरती करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। इसके बाद शिवजी को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं और इसे प्रसाद के रूप में बांटें। अंत में क्षमा प्रार्थना जरूर करें।
यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत पर शाम के समय करें यह एक काम, शादी की मुश्किलें होंगी दूर
यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत पर महादेव की ये आरती खोल देगी किस्मत के द्वार, जरूर करें इसका पाठ
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।