प्रसन्न वदनां, सौभाग्यदां...क्या आप जानते हैं सोशल मीडिया पर वायरल इस मंत्र सही मतलब?
सोशल मीडिया पर 'प्रसन्न वदनां, सौभाग्यदां भाग्यदां...' मंत्र काफी वायरल हो रहा है, जो महालक्ष्मी स्तोत्र का हिस्सा है। जानिए इस मंत्र का असल अर्थ? ...और पढ़ें

प्रसन्न वदनां, सौभाग्यदां... सोशल मीडिया पर वायरल इस मंत्र का अर्थ (AI-Generated Image)
HighLights
'प्रसन्न वदनां...' मंत्र सोशल मीडिया पर खूब वायरल।
यह मंत्र महालक्ष्मी स्तोत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मंत्र मां लक्ष्मी के स्वरूप और कृपा का वर्णन करता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू, बौद्ध और दुनिया भर की कई अन्य संस्कृतियों में श्लोक सिर्फ काव्यात्मक छंद ही नहीं, बल्कि पवित्र ध्वनियां भी है, जो अपने आस पास के वातावरण, हवा को सुंदर, शुद्ध और पवित्र ऊर्जा से भर देती है। संस्कृत में लिखे गए हर श्लोक में कंपन होता है, जो न सिर्फ उच्चारण करने वाले व्यक्ति बल्कि वातावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव दिखाता है।
काफी समय से सोशल मीडिया पर प्रसन्न वदनां, सौभाग्यदां भाग्यदां...मंत्र वायरल हो रहा है। वायरल हो रहा मंत्र महालक्ष्मी स्तोत्र का हिस्सा है। इस मंत्र को सोशल मीडिया पर रील्स और शॉर्ट वीडियोज में काफी यूज किया जा रहा है। आइए जानते हैं इस मंत्र का असल मतलब?
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल?
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मंत्र ‘प्रसन्न वदनां, सौभाग्यदां भाग्यदां…’ काफी वायरल हो रहा है। लोग अपनी वीडियो में इस मंत्र का इस्तेमाल कर तरह-तरह की धार्मिक वीडियो बना रहे हैं। यह पंक्तियां मां लक्ष्मी को समर्पित महालक्ष्मी स्तोत्र का हिस्सा है। मान्यताओं के मुताबिक, इस मंत्र का रोजाना उच्चारण करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
मजेदार बात यह है कि, आज की युवा पीढ़ी जो आमतौर पर मॉर्डन गानों पर कंटेंट बनाना पसंद करती हैं, उन्हें भी यह संस्कृत श्लोक काफी पसंद आ रहा है। इस्टाग्राम पर कई कंटेंट क्रिएटर्स घर की पूजा, दीप प्रज्वलन या मंदिर की साफ-सफाई के वीडियो में इस मंत्र का ही यूज कर रहे हैं। इससे यह बात तो साफ होती है कि, भक्ति और आस्था की जड़े सोशल मीडिया के जमाने में भी उतनी ही मजबूत है, जितनी कि सोशल मीडिया से पहले थी।
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श्लोक का अर्थ समझे
मंत्र की पहली पंक्ति का मतलब है कि, ‘वन्दे पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां’, मैं उस देवी को हाथ जोड़कर नमन करता हूं, जो हाथ में कमल का फूल धारण करती हैं, जिनका मुख हमेशा प्रसन्न रहता है, और जो लोगों को सौभाग्य और भाग्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
मंत्र की दूसरी पंक्ति का मतलब है कि, ‘हस्ताभ्याम अभयप्रदं मणिगणैर् नानाविधैर् भूषितं’ उनके हाथों में निर्भयता प्रदान करने की असीम शक्ति है और वह हर तरह के कीमती रत्नों, गहनों और आभूषणों से सुसज्जित हैं। यह पंक्ति उनकी शक्ति और उनके रूप का वर्णन करती हैं, जो रत्नों से ढकी हुई है और लोगों को मानसिक शक्ति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
तीसरी पंक्ति ‘भक्ताभीष्टफलप्रदं हरि-हर-ब्रह्मादिभिः सेवितं’ जिसका मतलब है कि, जो भी भक्त उनके प्रति श्रद्धा की भावना रखता है और प्रार्थना करता है, उसे इच्छित फल की प्राप्ति होती है और देवी की पूजा ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी करते हैं।
मंत्र की अंतिम पंक्ति ‘पार्श्वे पंकज-शंख-पद्म-निधिभिर्-युक्तं सदा शक्तिभिः’, का मतलब, देवी समृद्धि के प्रतीक हैं। वह कमल, शंख, खजाना और उससे बढ़कर हैं और उनके चारों ओर हर तरह की ऊर्जा और शक्ति है, जो सकारात्मक, उत्थानकारी और उनके भक्तों के लिए फायदे से भरी है।
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