प्रेमानंद महाराज जी की चेतावनी: ऐसे लोगों का साथ आज ही छोड़ दें, वरना जीवन भर नहीं मिलेगी शांति
प्रेमानंद जी महाराज ने मानसिक शांति के लिए कुछ लोगों से दूरी बनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि भगवान और भक्ति मार्ग की निंदा करने वालों से दूर रह ...और पढ़ें

भगवद और संत निंदा करने वालों से रहें दूर (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री प्रेमानंद जी महाराज जी आज के समय लोगों को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। श्री प्रेमानंद महाराज जी के दर्शन और प्रवचनों को सुनने के लिए भक्त दूर-दूर से वृंदावन पहुंचते हैं। श्री प्रेमानंद जी महाराज जी के प्रवचनों से लोगों को जीवन में सही मार्ग मिलता है।
महाराज जी बताते हैं कि कुछ ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए, जिनका आचरण ठीक न हो। उनके गलत आचरण से हमारा जीवन प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि अगर आप जीवन में मानसिक शांति की प्राप्ति चाहते हैं, तो कुछ लोगों का साथ आज ही छोड़ देना चाहिए। अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि वो कौन से लोग हैं, जिनसे दूरी बनाकर रखने में ही फायदा है, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं जीवन में किन लोगों का साथ ही छोड़ देना चाहिए।

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इन लोगों का साथ छोड़ें
श्री प्रेमानंद जी महाराज जी बताते हैं कि जो लोग भगवान और भक्ति मार्ग से दूर की बातें करते हैं, तो ऐसे लोगों का साथ नहीं रहना चाहिए। ऐसे लोगों के साथ रहना लाभकारी नहीं होता है। उन्होंने बताया कि जो समाज के लोगों और संतों की निंदा करते हैं, तो ऐसे लोगों का साथ छोड़ देना चाहिए। इस तरह के लोगों के साथ रहने से कुछ हाथ नहीं लगता और ये लोग दुर्गति को प्राप्त होने वाले हैं। श्री प्रेमानंद जी महाराज जी ने बताया है कि जीवन में ऐसे लोगों के साथ नहीं बैठना चाहिए, जो भक्त निंदा और भगवद निंदा करते हों।
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जीवन में सदैव श्यामा नाम का जप करना चाहिए। इससे हृदय में मस्ती आएगी। इससे कठिन परिस्थिति में भी भगवान का अनुभव होता है। जब आप अपना जीवन में श्यामा जी के चरणों में समर्पित कर दोगे, तब उनकी कृपा से आने वाले विघ्न दूर हो जाते हैं और एक अपार मस्ती रहती है।
श्री प्रेमानंद जी महाराज जी बताते हैं कि जीवन को श्यामा जी के चरणों में समर्पित न करने से दुख और संकटों का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से व्यक्ति जीवन में डिप्रेशन का शिकार होता है और मन में नकारत्मक विचार आते हैं।
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