जीवन में पाना चाहते हैं नाम और पैसा? प्रेमानंद महाराज से जानें भाग्य बदलने के 2 अचूक उपाय
प्रेमानंद महाराज ने जीवन में सफलता और भाग्य बदलने के दो महत्वपूर्ण नियम बताए हैं। इनमें निस्वार्थ सेवा और भगवान ...और पढ़ें

सफलता के लिए प्रेमानंद महाराज के सिद्धांत

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर इंसान की दिली तमन्ना होती है कि वह खूब नाम और पैसा कमाएं, लेकिन इन्हें हासिल करना इतना आसान नहीं होता। वृंदावन के संत श्री प्रेमानंद महाराज जी अपने प्रवचनों से लोगों का मार्गदर्शन तो करते ही हैं, लेकिन उन्हें सफल होने के कई तरीके भी बताते हैं।
अपने प्रवचनों में महाराज जी जीवन की सच्चाई को भक्तों के साथ साझा करते हैं। उनका मानना है कि, इंसान अपने जीवन में अगर कुछ खास चीजों को अपना ले, तो वह न सिर्फ अपनी किस्मत बदल सकता है. बल्कि सफलता की ऊंचाइयों तक भी पहुंच सकता है। आइए जानते हैं प्रेमानंद महाराज के बताए गए 2 ऐसे नियम जो व्यक्ति के भाग्य बदलने का दम रखते हैं।
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, जिस भी व्यक्ति को अपने जीवन में जल्दी सफलता हासिल करनी है, उन्हें 2 नियमों को अपने जीवन में शामिल करना चाहिए। पहला निस्वार्थ भाव से सेवा करना और दूसरा भगवान का नाम जाप।
निस्वार्थ भाव से सेवा
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, जिस भी व्यक्ति को संसार में सबसे जल्दी उन्नति प्राप्त करनी हो, उन्हें भगवान से मांगना चाहिए कि कभी किसी की सेवा करने का अवसर प्रदान करें। निस्वार्थ भाव से माता-पिता, गुरु, असहाय, बीमार, पशु-पक्षियों और जरूरतमंदों की तन, मन, धन और वचन से सेवा करनी चाहिए।
प्रेमानंद महाराज के अनुसार किसी की सेवा करने से आपके प्रारब्ध (कर्मफल) को खत्म कर देगा। किसी भी असहाय की मदद बिना स्वार्थ के करने से यह आपके पूर्व जन्म के खराब कर्मों को भी नष्ट करने की क्षमता रखता है। सनातन धर्म में सेवा को धर्म का सार बताया गया है।
प्रेमानंद महाराज जी का मानना है कि, निस्वार्थ भाव से सेवा करने पर भगवत मार्ग की प्राप्ति तो होती ही है, इसके साथ ही व्यक्ति के कर्म भी सुधरते हैं, जो उसे सफलता हासिल करने में काफी मदद करती है।
भगवान का स्मरण
प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि, मनुष्य को हर परिस्थिति में भगवान का स्मरण करना चाहिए, क्योंकि भगवान का नाम और उनका निरंतर स्मरण ही जीवन का असल धन है। जब व्यक्ति भगवान के नाम की महिमा को महसूस करता है, तो वह धीरे-धीरे सांसारिक मोह-माया से दूर हो जाता है। संसार में चाहे कितनी भी पैसा क्यों न हो, लेकिन मृत्यु के बाद कुछ भी साथ नहीं जाता है। सिर्फ भगवान का नाम ही व्यक्ति के साथ चलता है।
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि, जो व्यक्ति अपने जीवन में निस्वार्थ सेवा और भगवान का निरंतर स्मरण करता है, उसे कभी भी दुख, दरिद्रता और अशांति नहीं मिलती है। जब व्यक्ति इन चीजों से दूर रहता है, तो चीजें आपके हक में होती है, जो आपको धीरे-धीरे मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
