क्या 'अधिक मास' और 'पुरुषोत्तम मास' एक ही हैं? पढ़ें श्रीहरि के प्रिय महीने के जरूरी नियम
साल 2026 में अधिक मास का विशेष संयोग बन रहा है। जानिए क्यों इस महीने को भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना माना जाता है, इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या ह ...और पढ़ें

पुरुषोत्तम मास का महत्व क्या है? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि हिंदू पंचांग में कभी-कभी एक अतिरिक्त महीना क्यों जुड़ जाता है? साल 2026 भी ऐसा ही एक साल होने वाला है, जिसमें हमें 12 नहीं बल्कि 13 महीने मिलने वाले हैं। इस बढ़े हुए महीने को हम 'अधिक मास', 'मल मास' या 'पुरुषोत्तम मास' के नाम से जानते हैं। लेकिन, क्या अधिक मास ही पुरुषोत्तम मास है? चलिए आज इस गुत्थी को सुलझाते हैं।
क्यों पड़ा इसका नाम 'पुरुषोत्तम मास'?
पौराणिक कथाओं (जैसे पद्म पुराण और नारद पुराण) के अनुसार, कहा जाता है कि जब इस अतिरिक्त महीने की उत्पत्ति हुई, तो इसे 'मल मास' (गंदा या अशुद्ध महीना) कहा गया। कोई भी देवता इस महीने का स्वामी बनने को तैयार नहीं था क्योंकि इसमें कोई भी मांगलिक कार्य (जैसे शादी, मुंडन) नहीं होते थे।
अपनी उपेक्षा से दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास गया और अपनी व्यथा सुनाई। तब भगवान विष्णु ने दया भाव दिखाते हुए इस महीने को अपना नाम दिया। इसके बाद से ही इसे 'पुरुषोत्तम मास' कहा जाने लगा। उन्होंने वरदान दिया कि जो भी इस महीने में मेरी भक्ति करेगा, उसे साल भर की पूजा से भी अधिक फल मिलेगा। इसलिए इस महीने को 'अधिक मास' भी कहा गया। पद्म पुराण में एक पूरा खंड 'पुरुषोत्तम मास माहात्म्य के नाम से है। इसमें भगवान कृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को इस महीने की महिमा सुनाने का भी प्रसंग है।
विज्ञान और ज्योतिष का मेल
अगर हम ज्योतिष शास्त्र और पंचांग की गणना को देखें, तो यह कोई जादू नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक गणना है। सौर वर्ष (सूरज पर आधारित) 365 दिन और 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष (चांद पर आधारित) 354 दिनों का होता है। हर साल इन दोनों के बीच 11 दिनों का अंतर आ जाता है। तीन साल में यह अंतर लगभग 1 महीना (33 दिन) हो जाता है।
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इसी अंतर को बराबर करने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। जिसे 'पुरुषोत्तम मास' का नाम दिया गया है।
2026 में कब है यह महीना?
दृक पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में ज्येष्ठ के महीने में अधिक मास लगेगा। इसकी शुरुआत 17 मई को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगी और समापन 15 जून को ज्येष्ठ अमावस्या के दिन होगा। यह पूरा महीना भगवान विष्णु की विशेष भक्ति और उपासना के लिए समर्पित है।
इस दौरान क्या करें और क्या न करें?
- क्या न करें: चूंकि यह समय आत्म-शुद्धि का है, इसलिए शादी-ब्याह, नया घर खरीदना या जनेऊ संस्कार जैसे भारी आयोजन टाल दिए जाते हैं।
- क्या करें: शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। दीपदान (दीये जलाना), श्रीमद्भागवत कथा का पाठ और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करना बहुत शुभ माना जाता है।
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