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Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को 4 पर्वों का महासंयोग, पढ़ें रक्षाबंधन, नारली पूर्णिमा और श्रावणी उपाकर्म का महत्व 

Updated: Wed, 26 Aug 2026 02:42 PM (GMT+05:30)

28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के साथ नारली पूर्णिमा, श्रावणी उपाकर्म और संस्कृत दिवस का शुभ संयोग बन रहा है। आइए जानें यह दिन क्यों खास माना जा रहा है।

रक्षाबंधन, नारली पूर्णिमा, श्रावणी उपाकर्म और संस्कृत दिवस का अद्भुत महासंयोग (Picture Credit: AI Generated)

रक्षाबंधन, नारली पूर्णिमा, श्रावणी उपाकर्म और संस्कृत दिवस का अद्भुत महासंयोग (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. 28 अगस्त 2026 को चार पर्वों का शुभ संयोग।

  2. रक्षाबंधन, नारली पूर्णिमा, श्रावणी उपाकर्म, संस्कृत दिवस एक साथ।

  3. भाई-बहन के प्रेम, वैदिक परंपराओं और भाषा का महत्व।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 28 अगस्त 2026 का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास मांजा जा रहा है। इस दिन रक्षाबंधन के साथ अन्य पर्वों नारली पूर्णिमा, श्रावणी उपाकर्म और संस्कृत दिवस का शुभ संयोग भी बन रहा है। एक ही तिथि पर 4 पर्व मनाए जा रहे हैं जिनका अपना अलग महत्व है।

जहां एक तरफ रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के संकल्प का पर्व माना जाता है, वहीं नारली पूर्णिमा समुद्र और वरुण देव की पूजा से जुड़ा उत्सव है। वहीं श्रावणी उपाकर्म एक ऐसा पर्व है जिसमें यज्ञोपवीत बदलने और वैदिक परंपराओं के पालन का विशेष महत्व होता है।

यही नहीं इसी दिन संस्कृत दिवस भी मनाया जाएगा जिसमें संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण का संदेश भी दिया जाता है। आइए आपको बताते हैं इस दिन मनाए जाने वाले सभी पर्वों के महत्व के बारे में।

रक्षाबंधन कब मनाया जाएगा?

इस साल रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। सावन महीने की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त 2026, प्रातः 9:08 बजे से होगा और पूर्णिमा तिथि का समापन 28 अगस्त 2026 को प्रातः 9:48 बजे होगा।

ऐसे में राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, 28 अगस्त को प्रातः 5:57 बजे से प्रातः 9:48 बजे तक बन रहा है। चूंकि भद्रा काल 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए आपको राखी बांधने के लिए भद्रा के समाप्त होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

रक्षाबंधन का महत्व

रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहन के रिश्ते को अटूट बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं और उनसे अपनी सुरक्षा का वचन लेती हैं।

नारली पूर्णिमा क्या है?

यह पर्व मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गोवा और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में श्रावण पूर्णिमा को नारली पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से खासकर महाराष्ट्र एवं कोंकणी क्षेत्रों के अलावा गोवा, गुजरात के समुद्र तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरों के लिए खास माना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से समुद्र देव और वरुण देव की पूजा की जाती है और लोग समुद्र को नरियल अर्पित करते हैं। यही नहीं समुद्र की पूजा करके उनके प्रति आभार भी जताया जाता है।

नारली पूर्णिमा का महत्व

नारली पूर्णिमा के दिन मुख्य रूप से समुद्र को नारियल अर्पित करके उनके प्रति श्रद्धा दिखाई जाती है और अपनी सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है। इससे समुद्र देव का आशीर्वाद मिलता है और मछुआरों को जीवनयापन की सुविधाएं मिल पाती हैं।

श्रावणी उपाकर्म क्या होता है?

श्रावण पूर्णिमा के दिन यानी 28 अगस्त को ही सनातन धर्म का प्रमुख वैदिक अनुष्ठान श्रावणी उपाकर्म भी मनाया जाएगा। इस दिन की परंपरा के अनुसार जिन लोगों का उपनयन संस्कार यानी यज्ञोपवीत हो चुका होता है तो इस दिन वो लोग पुराने जनेऊ को उतारकर नया धारण करते हैं। इसके साथ ही इस दिन वेदों के प्रति श्रद्धा भी दिखाई जाती है और वेदों को पूजा होती है। श्रावणी उपाकर्म का मुख्य उद्देश्य वेदों के अध्ध्य्यन के प्रति संकल्प को दोहराना और ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना होता है।

श्रावणी उपाकर्म का महत्व

इस तिथि को यज्ञोपवीत बदलने के लिए एक शुभ अवसर के रूप में देखा जाता है। यह तिथि सभी वेदों का आभार व्यक्त करके के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

संस्कृत दिवस क्यों मनाया जाता है?

संस्कृत दिवस हर साल सावन पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है। हमारी संस्कृति के अनुसार संस्कृत भाषा को प्राचीनतम भाषा का दर्जा मिला है और उसी के लिए सम्मान दिखाने के लिए संस्कृत दिवस मनाया जाता है।

संस्कृत दिवस का महत्व

हमारी धार्मिक संस्कृति में संस्कृति को देव भाषा कहा जाता है। संस्कृत भाषा लगभग सभी वेदों और पुराणों की भाषा है। इसलिए इस भाषा के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए संस्कृति दिवस मनाया जाता है। .

संस्कृत भाषा के प्रति लोग आदर का भाव रखते हैं। हमारे धार्मिक ग्रंथ और मंत्र अधिकतर इसी भाषा में वर्णित है। श्रावणी पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला संस्कृत दिवस अपने आप में बहुत अनूठा दिन है, क्योंकि किसी भी अन्य प्राचीन भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार नहीं मनाया जाता है।

इस साल 28 अगस्त का दिन बहुत खास माना जा रहा है और चार अलग-अलग पर्वों का समायोजन इस दिन को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना रहा है।

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