Ram Navami 2026: क्यों मनाई जाती है राम नवमी, पढ़ें कैसे हुआ भगवान विष्णु के सातवें अवतार का जन्म?
राम नवमी का त्योहार भगवान राम के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पढ़ें राजा दशरथ के पुत्रकामेष्टि यज्ञ और दिव्य खीर की वो पौराणिक कथा जिसने मर्याद ...और पढ़ें
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Ram Navmi 2026: राम नवमी क्यों मनाते हैं? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेक्स, नई दिल्ली। चैत्र मास (Chaitra Maas) के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि राम नवमी (Ram Navmi) सिर्फ एक कैलेंडर की तारीख नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए 'मर्यादा पुरुषोत्तम' के आदर्शों को जीने का दिन है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान राम के जन्म की असल कहानी और इसके पीछे का गहरा रहस्य क्या है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ के पास सब कुछ था वैभव, कीर्ति और अपार साम्राज्य। कमी थी तो बस एक उत्तराधिकारी की। अपनी इस चिंता को लेकर वे ऋषि वशिष्ठ के पास गए। उनके मार्गदर्शन में महान ऋषि ऋष्यशृंग ने 'पुत्रकामेष्टि यज्ञ' संपन्न किया।
कहा जाता है कि यज्ञ की पूर्णाहुति पर स्वयं अग्नि देव प्रकट हुए और उन्होंने राजा दशरथ को दिव्य 'खीर' (प्रसाद) का एक पात्र दिया। राजा ने वह खीर अपनी तीन रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में बांट दी। इसी दिव्य प्रसाद के फलस्वरूप चैत्र नवमी के दिन महारानी कौशल्या की कोख से भगवान विष्णु के सातवें अवतार, श्री राम ने जन्म लिया।

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क्यों जरूरी था यह अवतार?
उस दौर में लंकापति रावण का अत्याचार बढ़ता जा रहा था। उसे वरदान प्राप्त था कि कोई देवता या दानव उसे नहीं मार पाएगा। रावण के अंत और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु को 'नर' रूप यानी मनुष्य अवतार लेना पड़ा। राम नवमी हमें याद दिलाती है कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर किसी न किसी रूप में हमारे बीच आते हैं।
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क्या कहते हैं शास्त्र?
भगवान राम के जन्म और इस कथा का सबसे विस्तृत वर्णन महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित 'वाल्मीकि रामायण' के बाल कांड में मिलता है। साथ ही, गोस्वामी तुलसीदास जी की 'रामचरितमानस' के बाल कांड में भी 'भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला' छंद के साथ इस अद्भुत घटना का वर्णन किया गया है।
राम नवमी 2026 की पूजा कैसे होती है?
पुराणों के अनुसार, राम नवमी का दिन केवल एक व्रत का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर प्रभु के आदर्शों को जीवन में उतारने का अवसर है। इस दिन देशभर के मंदिरों और घरों में मर्यादा पुरुषोत्तम की विशेष पूजा की जाती है।
- घर के मंदिर में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की तस्वीर को फूलों से सजाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- दोपहर 12 बजे (प्रभु के जन्म के समय) आरती करें और 'भए प्रगट कृपाला' का पाठ कर खुशियां मनाएं।
- श्रद्धा के अनुसार, रामायण या रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ करें। यह घर में सुख-शांति लाता है।
- परिवार के साथ मिलकर प्रभु के भजनों का आनंद लें। कई लोग इस दिन कलश स्थापना और राम कथा भी करवाते हैं।
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