कौन थीं सुलोचना? जिनकी पतिभक्ति के आगे झुक गई थी पूरी वानर सेना
रामायण का वह भावुक प्रसंग जब मेघनाद की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सुलोचना पति के कटे सिर के लिए भगवान राम के सामने पहुंचीं। आइए उस कथा के बारे में पढ़ते ...और पढ़ें

मेघनाद की पत्नी सुलोचना की सतीत्व कथा।
HighLights
सुलोचना लंकापति रावण के सबसे पराक्रमी पुत्र इंद्रजीत की पत्नी थीं
सुलोचना का पतिव्रता धर्म बेहद शक्तिशाली था
मेघनाद का कटा हुआ सिर भी उनके बुलाने पर हंस पड़ा था
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण महाकाव्य में जहां एक ओर अधर्म पर धर्म की विजय की गाथा है, वहीं दूसरी ओर इसमें कई ऐसे महान पात्रों का के बारे में भी बताया गया है, जिनका चरित्र त्याग, मर्यादा और शक्ति की मिसाल है। ऐसा ही एक नाम है सुलोचना का। सुलोचना रावण के पुत्र मेघनाद यानी इंद्रजीत की पत्नी थीं। जब लक्ष्मण जी के हाथों मेघनाद का वध हुआ, तो उसका धड़ लंका में गिरा और सिर श्रीराम की सेना के पास रह गया।
इसके बाद जो हुआ, वह सतीत्व की सबसे बड़ी कथा बन गया। वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास जी रचित रामचरितमानस में लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध के बारे में विस्तार से बताया गया है, आइए यहां उससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।

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रामो न मानुषो देवः साक्षान्नारायणो अव्ययः।।
तस्याहं शरणं यामि यस्य भर्ता हतो रणे।।
जब मेघनाद के कटे सिर ने गवाही दी
धार्मिक प्रसंगों के अनुसार, जब मेघनाद का धड़ लंका में सुलोचना के पास पहुंचा, तो रावण ने इसे राम की माया कहा। तब सुलोचना ने अपने पतिव्रत धर्म की शक्ति से कहा कि अगर मैं सच्ची पत्नी हूं, तो यह धड़ खुद लिखकर बताएगा कि उसका सिर कहां है। तब उस निर्जीव धड़ के हाथ ने लिखकर बताया कि उसका सिर श्री राम के शिविर में है। रावण ने सुलोचना को राम के पास जाने से रोका, लेकिन सुलोचना ने कहा कि जो पूरे जगत के स्वामी हैं, उनके पास जाने में कैसा संकोच?
नमोऽस्तु रामाय सक्ष्मणाय देव्या च तस्यै जनकात्मजायै।।
यत्पादपद्मप्रणतेन मूर्ध्ना मृतोऽपि जीवत्युत लक्ष्मणेन।।
श्री राम के शिविर में सुलोचना पहुंची
अकेले ही भगवान राम के शिविर की ओर चल पड़ीं। जब वानर सेना ने रावण की बहू को आते देखा, तो सब हैरान रह गए। सुलोचना ने श्रीराम से कहा कि हे प्रभु मैं यहां युद्ध या न्याय मांगने नहीं, बल्कि अपने मृत पति का सिर लेने आई हूं ताकि मैं सती हो सकूं। किसी को विश्वास नहीं हुआ कि कटा सिर हंस या बोल सकता है। तब सुलोचना के कहने पर जब सिर के पास दीपक लाया गया, तो वह कटा सिर जोर से हंस पड़ा। इस दृश्य को देखकर साक्षात विष्णु के अवतार प्रभु राम और उनकी सेना ने सुलोचना के पातिव्रत्य धर्म को नमन किया।
मर्यादा और मोक्ष की प्राप्ति
भगवान राम ने आदर के साथ मेघनाद का कटा हुआ सिर सुलोचना को सौंप दिया। लक्ष्मण जी को बहुत दुख हुआ कि उन्होंने एक ऐसी महान नारी का सुहाग छीना, लेकिन श्रीराम ने सबको समझाया कि यह नियति और धर्म की स्थापना के लिए जरूरी था। सुलोचना पति का सिर लेकर समुद्र तट पर आईं और अग्नि तैयार कर अपने पति के साथ सती हो गईं।
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