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कौन थीं किष्किंधा की महारानी तारा और कैसे हुआ था महाबली बाली से उनका विवाह?

Published: Sun, 23 Aug 2026 03:00 PM (IST)

रामायण में बाली की पत्नी तारा एक अप्सरा थीं, जिनका जन्म समुद्र मंथन से हुआ था। भगवान विष्णु ने बाली ...और पढ़ें

बाली की पत्नी और किष्किंधा की महारानी तारा की पौराणिक कथा

बाली की पत्नी और किष्किंधा की महारानी तारा की पौराणिक कथा

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण में जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण 14 साल का वनवास भोग रहे थे, तब लंकापति रावण ने जनक नंनदी का छल से अपहरण कर लिया था। सीता खोज के लिए भगवान राम और लक्ष्मण जंगल-जंगल भटके, कई योद्धाओं और ऋषि-मुनियों से मिले।

इसी खोज के दौरान श्रीराम की मुलाकात बाली के भाई सुग्रीव से भी हुई थी। बाली जो किष्किंधा का राजा था और उसकी पत्नी जिसका नाम तारा था एक अप्सरा थी। आखिरकर अति बलशाली बाली की पत्नी कौन थी और बाली से उनका विवाह कैसे हुआ आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा।

तारा कौन थीं?

तारा वानर राजा बाली की पत्नी और किष्किंधा की महारानी थीं। कुछ कथाओं में उन्हें देवगुरु बृहस्पति की पुत्र बताया गया है। वही अन्य कथाओं में उन्हें वानर वैद्य सुषेण की पुत्री भी कहा गया है। बाली की पत्नी होने के साथ वह राजकुमार अंगद की माता थीं।

पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन के दौरान अन्य अप्सराओं के साथ तारा का भी जन्म हुआ था। सतयुग में देवताओं और असुरों द्वारा जब समुद्र मंथन किया गया था, तब 14 मणियां हासिल हुई थीं, उनमें से एक तारा भी थी। हिंदू धर्म में पंचकन्याओं में तारा को भी गिना जाता है।

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तारा-बाली का विवाह कैसे हुआ?

समुद्र मंथन से तारा का जन्म हुआ था और उस वक्त सभी बाली समेत सभी देवतागण वहां मौजूद थे। जब समुद्र मंथन से तारा अवतरित हुई तो वह काफी सुंदर दिखाई दे रही थी। अप्सरा तारा को देखने के बाद बाली और सुषेण दोनों उसपर मोहित हो गए और उसके साथ शादी करने की इच्छा जाहिर की। तारा को लेकर दोनों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई। तब भगवान विष्णु ने हस्तक्षेप कर दोनों को तारा के पास जाकर खड़े होने का आदेश दिया।

श्रीहरि के आदेश के बाद बाली तारा के दाहिनी ओर और सुषेण बाईं ओर खड़े हो गए। इसके बाद भगवान विष्णु बोलें, धर्म के मुताबिक कन्या के दाहिनी ओर उसका होने वाला पति खड़ा होता है, जबकि बाईं तरफ कन्यादान करने वाला पिता खड़ा होता है। इस हिसाब से तारा का पति बाली को माना जाएगा। भगवान विष्णु के इस निर्णय के बाद अप्सरा तारा ने बाली के साथ शादी रचाई।

कहा जाता है कि, जब सुग्रीव अपने भाई बाली को युद्ध के लिए ललकारने के लिए आए तब तारा ने बाली को बाहर न जाने की चेतावनी दी। उन्हें संदेह था कि हाल ही में पराजित हुए सुग्रीव का यह असाधारण आत्मविश्वास किसी शक्तिशाली सहायक का समर्थन मिलना हो सकता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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