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    क्यों जगन्नाथ भगवान को लगाया गया 'अधर पाना' का भोग जमीन पर बहा दिया जाता है? वजह जानकर उड़ जाएंगे होश

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 11:50 AM (IST)

    पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा में 'अधर पान' एक विशेष अनुष्ठान है, जिसमें देवताओं को मीठा पेय अर्पित कर रथों की रक्षा करने वाली अदृश्य शक्तियों के लिए जमीन ...और पढ़ें

    जगन्नाथ रथ के दौरान प्रसाद जमीन पर क्यों फेंका जाता है? (AI Image)

    जगन्नाथ रथ के दौरान प्रसाद जमीन पर क्यों फेंका जाता है? (AI Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उड़ीसा के पुरी में हर साल होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि आस्था, ऊर्जा और परंपरा का अनूठा संगम है। हर वर्ष इस भव्य यात्रा में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।

    यह वही समय होता है जब भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ यात्रा में सवार होकर भक्तों के बीच आते हैं। मगर इस यात्रा के दौरान एक खास तरह की परंपरा (अधर पान) निभाई जाती है, जो देखने में हर किसी को हैरान कर सकती है। आइए जानते हैं इसके बारे में?

    अधर पान पुरी जगन्नाथ मंदिर में रथ उत्सव के दौरान मनाया जाने वाला एक खास अनुष्ठान है। हर साल यह अनुष्ठान आषाढ़ महीने की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है, जिसमें मिट्टी से बनाए गए बर्तनों में 100 लीटर पाना (मीठा जल) देवताओं को अर्पित किया जाता है।

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    अधर पाना क्या होता है?

    जब पुरी की सड़कों पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली जाती है, तो उस दौरान कई तरह के भोग चढ़ाए जाते हैं। उन्हीं में से एक खास पेय जो सफेद रंग का होता है, जिसे अधर पाना कहते हैं, चढ़ाया जाता है।

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    यह पेय दुध, तुलसी, केला, कपूर, काली मिर्च, दालचीनी जैसी चीजों को मिलाकर बनाया जाता है, जो दिखने में बिल्कुल खीर की तरह लगती है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि, इसे कोई भक्त या पुजारी पीते नहीं हैं, बल्कि इसे रथ पर भगवान जगन्नाथ के होंठों से छुआकर जमीन पर फेंक दिया जाता है।

    भक्तों को क्यों हैं प्रसाद पीने की मनाही?

    आधार पान पेय भक्तों को पीने की मनाही इसलिए होती है, क्योंकि यह केवल भगवान को समर्पित होता है और जिसके बाद इसे दिखाई न देने वाली शक्तियों के लिए छोड़ दिया जाता है। इसमें भूत-प्रेत, पिशाच और वो देवता शामिल होते हैं, जो रथों की रक्षा करते हैं। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर कहा जाता है कि, इसमें सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि भूत-प्रेत, देवता और नकारात्मक शक्तियां भी शामिल होती हैं। इन्हें शांत रखने के लिए ही आधार पान जमीन पर गिराया जाता है।

    यह परंपरा आम भोग से बिल्कुल अलग है। यह एक खास तरह की पूजा पद्धति होती है, जो तीन दिनों तक चलती है। रथ यात्रा के 10वें, 11वें और 12वें दिन इस पेय को मिट्टी के तीन बड़े बर्तनों में भरकर रखा जाता है। इस भोग खास तरह के लोगों द्वारा तैयार किया जाता है, जिन्हें स्थानीय भाषा में महासूरा कहते हैं।

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    रथ यात्रा में शामिल होने से पहले इन बातों का रखें खास ख्याल

    अगर आप पुरी में जगन्नाथ रथ में शामिल होते हैं, तो इस प्रसाद का सेवन करने के साथ इन्हें छूने से भी बचना चाहिए। यह भक्तों के खाने-पीने के लिए नहीं होता है। इसे जमीन पर फेंकने का अर्थ है कि, यह प्रसाद दुनिया की उन शक्तियों के लिए है, जिसे हम सामान्य आंखों से देख नहीं सकते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।