Ravi Pradosh 2026 Vrat: रवि प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें, जागेगा सोया भाग्य
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार रवि प्रदोष व्रत (Ravi Pradosh 2026 Vrat) 01 मार्च को रखा जाएगा। ...और पढ़ें

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार रवि प्रदोष व्रत (Ravi Pradosh 2026 Vrat) 01 मार्च को रखा जाएगा।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेक्स, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे पावन दिन माना जाता है। जब यह व्रत रविवार को पड़ता है, तो इसे रवि प्रदोष कहते हैं। रविवार का संबंध सूर्य देव से है और प्रदोष का शिव से। ऐसे में इस दिन भगवान शिव और सूर्य देव की विशेष पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष के दिन (Ravi Pradosh 2026 Vrat) शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से व्यक्ति का सोया हुआ भाग्य जाग उठता है। आइए जानते हैं रवि प्रदोष पर वे कौन सी चीजें हैं, जो आपकी किस्मत बदल सकती हैं।

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शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं ये 5 चीजें (Ravi Pradosh 2026 Vrat Shivaling Rituals)
गुड़ मिश्रित जल
रवि प्रदोष के दिन तांबे के पात्र में शुद्ध जल भरकर उसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाएं। फिर इस जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। इस उपाय को करने से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और सरकारी कामों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
लाल चंदन का लेप
शिवलिंग पर लाल चंदन का लेप लगाना रवि प्रदोष के दिन बहुत फलदायी माना गया है। लाल रंग ऊर्जा का प्रतीक है। कहा जाता है कि यह लेप लगाने से व्यक्ति को शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
कनेर के लाल या पीले फूल
भगवान शिव को कनेर के फूल बहुत प्रिय हैं। ऐसे में रवि प्रदोष के दिन लाल या पीले रंग के कनेर के फूल शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे घर की दरिद्रता का नाश होता है और देवी लक्ष्मी का वास होता है।
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बिल्व पत्र पर लिखें यह मंत्र
तीन पत्तों वाला बिना कटा-फटा बिल्व पत्र लें और उसपर 'ॐ' लिखें। फिर इसे शिवलिंग पर अर्पित करें। यह उपाय करने से करियर में सफलता मिलती है। साथ ही भगवान शिव खुश होते हैं।
अक्षत और काले तिल
इस दिन शिवलिंग पर अक्षत और थोड़े से काले तिल चढ़ाने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है और पितृ दोष से भी राहत मिलती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा हमेशा प्रदोष काल में ही करें।
- पूजन के समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
- तांबे के लोटे का उपयोग जल चढ़ाने के लिए करें, लेकिन ध्यान रहे कि तांबे के पात्र से दूध न चढ़ाएं।
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