क्यों कहा जाता है गोदावरी नदी को 'बूढ़ी गंगा', जानिए इसके पीछे छुपा पौराणिक रहस्य
गोदावरी नदी को 'बूढ़ी गंगा' क्यों कहा जाता है, इसका पौराणिक रहस्य शिव पुराण में वर्णित है। ...और पढ़ें

गोदावरी नदी का रहस्य: क्यों कहलाती है 'बूढ़ी गंगा' और क्या है इसका पौराणिक महत्व (Picture Credit- AI Generated)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
हिंदू धर्म में कई नदियां हैं, जिन्हें बेहद पवित्र और दिव्य माना गया है। गोदावरी नदी उन्हीं में से एक है। इसे कई अन्य नामों से भी पुकारा जाता है, जैसे- दक्षिण की गंगा , बूढ़ी गंगा आदि। लोगों में यह जानने की उत्सुकता हमेशा देखी गई हैं कि आखिर गोदावरी को इन नामों से क्यों पुकारा जाता है। जबकि गोदावरी का उद्गम स्थन पूर्व है और एक नदी को बूढ़ा कहना कितना उचित है।
आपको बता दें कि शिव पुराण में गोदावरी नदी के उद्गम और महिमा का वर्णन बहुत भली प्रकार से किया गया है। इस पुराण की कोटिरुद्र संहिता के अंतर्गत त्र्यंबकेश्वर माहात्म्य में आपको इस नदी के बारे में विस्तार से जानने को मिल जाएगा।
गोदावरी को क्यों कहा जाता है 'बूढ़ी गंगा'?
इससे जुड़ी एक कथा है। कथा के अनुसार ब्रह्मगिरी पर्वत के आस-पास के क्षेत्रों में पहले घना जंगल हुआ करता था। सौ वर्षों से वहां वर्षा नहीं हो रही थी। इससे सूखा पड़ने लगा। तब गौतम ऋषि ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की और उसके बल पर उस क्षेत्र में बारिश हुई। इतना ही नहीं, गौतम ऋषि ने अपनी शक्ति से कुछ दिव्य खेत भी तैयार किए, इनमें कभी अनाज खत्म नहीं होता था।
गौतम ऋषि के इस प्रभाव और शक्ति के कारण क्षेत्र में ख्याति बढ़ने लगी। तब ही कुछ ऋषियों को उनसे ईर्ष्या होने लगी। गौतम ऋषि को सताने के लिए उन ऋषियों ने खेतों में एक दुर्बल गाय को छोड़ दिया, जो वृद्ध भी थी और जिसके बचने की संभावनाएं खत्म हो गई थीं। जब गौतम ऋषि ने उस गाय को देखा, तो उसे खेत से निकालने के उद्देश्य से स्पर्श किया। स्पर्श करते ही वह मर गई।
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यह देख ऋषियों ने उन पर गौहत्या का आरोप लगाया। गौतम ऋषि ने इस आरोप को खुद पर से हटाने के लिए फिर से कठोर तपस्या की। उनके इस तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए। शिव से वरदान के स्वरूप गौतम ऋषि ने पवित्र नदी गंगा की एक धार मांगी, जिसमें स्नान करने के बाद वह अपने पापों से मुक्त हो सकें।
(Picture Credit- magnific)
भगवान शिव ने जैसे ही अपनी जटाओं से गंगा की धारा को मुक्त किया, देवी गंगा ने उनके आगे शर्त रख दी, "अगर महादेव इस क्षेत्र में ठहरेंगे, तब ही वह भी यहां थमेंगी।" तब जाकर त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में शिव जी वहीं निवास करने लगे। तब जाकर त्रंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में शिव जी वहीं निवास करने लगे।
गोदावरी का जन्म एक गौहत्या के कारण किए गए तप के बाद हुआ इसलिए उसका नाम 'गोदावरी' पड़ गया। वहीं इसे बूढ़ी गंगा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि गंगा की केवल एक धार ही इस क्षेत्र में बहती है।
गोदावरी नदी का महत्व
ऐसी मान्यता है कि गोदावरी में एक डुबकी भर लगा लेने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं, उसकी बुद्धि शुद्ध हो जाती है और वह अच्छे कर्म करने लगता है।इसलिए इस नदी को गंगा के समान ही दर्जा प्राप्त है।
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