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हनुमान जी को क्‍यों कहा जाता है 'बाला जी' ? बहुत रोचक है पौराणिक कथा

Published: Fri, 26 Jun 2026 07:25 PM (IST)

स्कंद पुराण में हनुमान जी को 'बाला जी' कहे जाने का कारण बताया गया है। यह नाम उन्हें बाल अवस्था ...और पढ़ें

हनुमान जी को बाला जी कहने के पीछे की पौराणिक कथा और रोचक वजह  (Picture Credit- AI Generated)

हनुमान जी को बाला जी कहने के पीछे की पौराणिक कथा और रोचक वजह (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हनुमान जी का हम जब भी स्मरण करते हैं, तब हमें एक शक्तिशाली और विराट रूप वाले देवता की ही छवि नजर आती है। हनुमान जी को हम कई नामों से भी पुकारते हैं और उनमें से एक नाम है 'बाला जी'। हनुमान जी को बाला जी क्यों कहा जाता है, इसका जिक्र केवल एक ही हिंदू ग्रंथ में मिलता है और वो है स्कंद पुराण।

स्कंद पुराण में 'वैष्णव खंड' के अंतर्गत 'वेंकटाचल माहात्म्य' श्री हनुमान जी की उत्पत्ति का जिक्र मिलता है। इस खंड में बताया गया है कि हनुमान जी का जन्‍म कैसे हुआ और उनके हर नाम के पीछे क्‍या कथा छुपी हुई है।

क्‍यों कहा जाता है हनुमान जी को 'बाला जी'?

बालाजी का सरल अर्थ है बालक। यह नाम हनुमान जी को उनकी बाल अवस्था में दिया गया था। पुराण में बताया गया है, हनुमान जी जब छोटे थे तब बहुत नटखट थे। साथ ही उनके अंदर अपार शक्ति भी थी। अपनी शक्तियों के बल पर हनुमान जी ने अपने बालकाल में कई लीलाएं दिखाई हैं। इन लीलाओं में सबसे प्रचलित थी सूर्य देव को फल समझकर खा जाने वाली लीला। इसलिए उन्हें बचपन से ही बालाजी कहा जाने लगा। उनका यह नाम उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में बहुत फेमस है। राजस्थान में ही सालासर बालाजी और मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर है। हालांकि, यहां पर मौजूद हनुमान जी की प्रतिमाओं से उनके बालकाल का कोई संबंध नहीं है, मगर प्रेम से यहां के लोग उन्हें बाला जी ही कहकर पुकारते हैं।

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शिव और विष्‍णु के बीच का सेतु हैं 'बाला जी'

स्‍कंद पुराण के 'वैष्णव खंड' में इस बात का भी उल्‍लेख मिलता है कि माता अंजना के पिता केसरी भगवान शिव के बहुत बड़े भक्‍त थे और उनकी भक्‍ती से प्रसन्‍न होकर शिव जी ने उन्‍हें एक वरदान दिया था। कथा के अनुसार, वरदान में केसरी ने शिवजी से उन्हें अपने पुत्र के रूप में मांगा था, मगर शिवजी ने केसरी से कहा कि वे उन्हें पुत्रिका के रूप में मिल सकते हैं। पुत्रिका यानी पुत्री के पुत्र के रूप में। माता अंजना के पति का नाम भी केसरी था। दोनों ही पुत्र की अभिलाषा रखते थे और कई व्रत-पूजा के बाद भी उन्हें पुत्र नहीं हो रहा था। जब दोनों ने शिव जी की पूजा की, तो वरदान के रूप में भगवान शिव ने फलस्‍वरूप उन्हें हनुमान जी के रूप में पुत्र दिया। हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्‍हें भगवान विष्‍णु के अवतार श्री राम जी का सबसे बड़ा भक्‍त भी कहा गया है। इस तरह से हनुमान जी में शिव की शक्ति और विष्‍णु की भक्‍ति है। बताया जाता है कि ब्रह्मा जी ने हनुमान जी को यह नाम दिया था। वहीं महादेव और श्री हरि विष्‍णु ने उन्‍हें बाला जी कहकर पुकारा था।

अतः बालाजी एक वैदिक शब्द है। जो हृदय की पवित्रता से उत्पन्न हुआ है। इस नाम में न तो वासना है, न विकार है। यह दोषमुक्त है और प्रेम से भरा हुआ एक नाम है, इसलिए हनुमान जी को इस नाम से पुकारा जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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