कब और क्यों मनाया जाता है रोहिणी व्रत? जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर से जुड़ा है कनेक्शन
शास्त्रों में निहित है कि जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी हैं। भगवान वासुपूज्य स्वामी का जन्म बिहार राज्य के भागलपुर में हुआ था। महा ...और पढ़ें
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Rohini Vrat: रोहिणी व्रत का धार्मिक महत्व (Image Source: AI-Generated)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में रोहिणी व्रत का खास महत्व है। यह पर्व हर महीने धूमधाम से मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर जैन धर्म के अनुयायी या साधक (Jain Community Traditions) स्नान-ध्यान के बाद भक्ति भाव से भगवान वासुपूज्य की पूजा करते हैं। वहीं, मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। महिला और पुरुष दोनों वर्ग के लोग रोहिणी व्रत रख सकते हैं।
धार्मिक मत है कि रोहिणी व्रत करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। लेकिन क्या आपको पता है कि कब और क्यों रोहिणी व्रत रखा जाता है और भगवान वासुपूज्य से क्या संबंध है? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-
रोहिणी व्रत
जैन धर्म के जानकारों की मानें तो नभ मंडल में 27 नक्षत्र हैं। नक्षत्र प्रतिदिन बदलते हैं। आसान शब्दों में कहें तो रोजाना नक्षत्र परिवर्तन होता है। जिस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग (Rohini Nakshatra Fasting) बनता है, उस दिन रोहिणी व्रत रखा जाता है। इस शुभ अवसर पर रोहिणी व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान वासुपूज्य को समर्पित होता है, जो जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर हैं।
रोहिणी व्रत महत्व
जैन धर्म में रोहिणी व्रत का खास महत्व है। यह व्रत सुख और सौभाग्य में वृद्धि के लिए रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। इस शुभ अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। भक्तजन भगवान वासुपूज्य के दर्शन हेतु यात्रा भी करते हैं।
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भगवान वासुपूज्य

भगवान वासुपूज्य (Lord Vasupujya Puja) जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर हैं। इनका जन्म बिहार के सिल्क सिटी यानी भागलपुर में हुआ था। तत्कालीन समय में भागलपुर को चंपापुर कहा जाता था। तपस्या से भगवान वासुपूज्य को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
ऐसा कहा जाता है उत्तरायण में भगवान वासुपूज्य को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। वर्तमान समय में मंदार पर्वत के शीर्ष पर भगवान वासुपूज्य का भव्य मंदिर है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान वासुपूज्य के दर्शन हेतु मंदार हिल पहुंचते हैं।
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