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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 19, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Rudraksha: भगवान शिव को प्रिय है रुद्राक्ष, जानें कैसे हुई इसकी उत्पत्ति? पढ़ें रोचक कथा

    Updated: Sun, 19 May 2024 12:04 PM (GMT+05:30)

    सनातन धर्म में रुद्राक्ष को बहुत ही महत्वपूर्ण और पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि रुद्राक्ष धारण करने से जातक पर देवों के देव महादेव की कृपा ...और पढ़ें

    Rudraksha: भगवान शिव को प्रिय है रुद्राक्ष, जानें कैसे हुई इसकी उत्पत्ति? पढ़ें रोचक कथा
    Rudraksha: भगवान शिव को प्रिय है रुद्राक्ष, जानें कैसे हुई इसकी उत्पत्ति? पढ़ें रोचक कथा

    HighLights

    1. रुद्राक्ष को बहुत ही पवित्र माना गया है।
    2. रुद्राक्ष धारण करने के लिए नियम का पालन करना चाहिए।
    3. रुद्राक्ष भगवान शिव को प्रिय है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Rudraksha Katha in Hindi: सनातन धर्म में रुद्राक्ष का अधिक महत्व है। भगवान शिव को रुद्राक्ष प्रिय है। धार्मिक मान्यता है कि रुद्राक्ष धारण करने से जातक पर देवों के देव महादेव की कृपा सदैव बनी रहती है। रुद्राक्ष की उत्पत्ति को लेकर कई पौराणिक कथाएं मौजूद हैं। आइए जानते हैं कि किस तरह हुई रुद्राक्ष (Rudraksh Origin) की उत्पत्ति?

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    इस तरह हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति

    प्राचीन कथा के अनुसार, एक त्रिपुरासुर नामक दैत्य था। उसे अपनी शक्ति का अधिक घमंड था। इसलिए उसने पृथ्वी के साथ देव लोक में भी हाहाकार मचा दिया था। उसे कोई भी देवी-देवता और अस्त्र परास्त नहीं कर पा रहे थे, जिस कारण देवी-देवता भगवान शिव के पास अपनी प्रार्थना लेकर पहुंचे। जब देवी-देवता कैलाश पर्वत पर पहुंचे, तो उस दौरान भगवान महादेव योग मुद्रा में अपने नेत्रों को बंद कर तप कर रहे थे, जब प्रभु ने नेत्र खोला तब उनकी आंखों से कुछ अश्रु छलक कर धरती पर गिर गए। शिव के इन आंसू से रुद्राक्ष के पेड़ का जन्म हुआ। मान्यता है कि जिस जगह पर महादेव के आंसू गिरे, वहां पर रुद्राक्ष के पेड़ उग आए। इसलिए रुद्राक्ष को भगवान शिव के तीसरे नेत्र का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की जाती है। इसी तरह रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई।  

    इस दिन धारण कर सकते हैं रुद्राक्ष

    रुद्राक्ष को धारण करने के लिए नियमों का पालन करना चाहिए। अगर आप रुद्राक्ष की माला पहनना चाहते हैं, तो इसके लिए शुभ दिन श्रावण सोमवार, शिवरात्रि, अमावस्या और पूर्णिमा है। रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व इसे सरसों के तेल और दूध से साफ कर लें। इसके बाद 'ओम नमः शिवाय मंत्र' मंत्र जाप के साथ रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।  

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।  

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