Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    मंदिर जाना या व्रत रखना नहीं, प्रेमानंद महाराज के अनुसार यह है ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा!

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 10:44 AM (GMT+05:30)

    प्रेमानंद महाराज ने बताया कि मन, वचन और कर्म से किसी को दुख न पहुंचाना ही सबसे बड़ी पूजा है। उन्होंने रामचरितमानस का उदाहरण देते हुए कहा कि परोपकार से ...और पढ़ें

    भगवान की सबसे बड़ी पूजा क्या है? प्रेमानंद महाराज से जानिए

    भगवान की सबसे बड़ी पूजा क्या है? प्रेमानंद महाराज से जानिए

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कभी आपने सोचा है कि, सबसे बड़ी पूजा क्या है? एक ऐसा सवाल जो लगभग हर उस इंसान के मन में एक न एक बार जरूर आता है, जो ईश्वर से जुड़ना चाहता है।

    हममें से ज्यादातर लोग मंदिरों में घंटों पूजा, जप-पत, प्रार्थना, कठिन व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करते हैं, लेकिन क्या वाकई ये भगवान के समीप जाने का एकमात्र तरीका है? वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का बड़ी ही सादगी और सरलता से जवाब दिया।

    भगवान की सबसे बड़ी पूजा क्या है?- प्रेमानंद महाराज

    प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचन के दौरान कई लोगों के मन की शंका को दूर करने में मदद करते हैं। महाराज जी से अपने उत्तर पाने के बाद भक्त भी संतुष्ट दिखाई देते हैं। प्रेमानंद महाराज से जब एक भक्त ने सवाल करते हुए पूछा कि, भगवान की सबसे बड़ी पूजा क्या है?

    भक्त के सवालों का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि, व्यक्ति को किसी को भी मन, शरीर और वाणी से दुख नहीं पहुंचाना चाहिए और यही भगवान की सबसे बड़ी पूजा है। न हम वाणी से कुछ ऐसा बोले जो किसी को दुख पहुंचे, न शरीर से हम किसी के साथ हिंसा करें और न ही मन से किसी को दुख पहुंचाने की कोशिश करें, यही ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है।

    महाराज जी श्रीरामचरित मानस की एक चौपाई के माध्यम से समझाते हुए कहते हैं कि,

    पर हित सरिस धर्म नहिं भाई।
    पर पीड़ा सम नहिं अधमाई॥

    अर्थ- दूसरों की भलाई करने के समान सृष्टि में कोई दूसरा धर्म नहीं है। और दूसरों को कष्ट पहुंचाने या दुख देने से कोई भी बड़ा अधर्म या पाप नहीं है।

    भलाई से बड़ी कोई पूजा नहीं

    कुल मिलाकर कहने का अर्थ यह है कि, अगर आप किसी को वाणी, मन या शरीर से कष्ट पहुंचाने की कोशिश करते हैं, तो चाहे आप कितना ही गंगा नहा लें या पूजा कर लें, ईश्वर की आपकी भक्ति से कभी खुश नहीं होगा।

    खबरें और भी

    वही आप वाणी, शरीर या मन से किसी का भला करते हैं, तो बिना पूजा-पाठ किए भी ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहेगी। इसलिए ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा दूसरों की भलाई करना है।

    यह भी पढ़ें- खराब लाइफस्टाइल से हैं परेशान? प्रेमानंद महाराज से जानिए दिनचर्या सुधारने के अचूक नियम

    यह भी पढ़ें- सड़क दुर्घटना से बचाएगा प्रेमानंद महाराज का यह अचूक मंत्र, घर से निकलने से पहले बस 11 बार करें जाप

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।