साईं बाबा के दर से कोई खाली नहीं जाता, गुरुवार को ऐसे करें पूजा, बरसने लगेगी कृपा
क्यों गुरुवार को ही साईं बाबा का व्रत किया जाता है। पढ़ें गुरुवार व्रत का सही समय, सरल पूजा विधि और उद्यापन के नियम। ...और पढ़ें

Sai Baba Vrat Katha: साईं बाबा की पूजा (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेक्स, नई दिल्ली। साईं बाबा के प्रति करोड़ों लोगों की अटूट श्रद्धा है। उन्हें प्रेम, करुणा और 'सबका मालिक एक' का संदेश देने वाले संत के रूप में पूजा जाता है। गुरुवार का दिन विशेष रूप से साईं बाबा को समर्पित माना जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और बाबा की कृपा पाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
साईं बाबा के बारे में कहा जाता है कि वे केवल भाव के भूखे हैं। उनके व्रत की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता है। यह व्रत कोई भी व्यक्ति (बच्चे, बुजुर्ग, स्त्री या पुरुष) कर सकता है, चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो।
व्रत की शुरुआत कैसे करें?
यह व्रत किसी भी गुरुवार से शुरू किया जा सकता है। भक्त आमतौर पर 9, 11 या 21 गुरुवार के व्रत का संकल्प लेते हैं। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और मन में साईं बाबा का ध्यान करें।
पूजा की सरल विधि
- एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर साईं बाबा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- बाबा की तस्वीर को साफ कपड़े से पोंछें। उन्हें चंदन या कुमकुम का तिलक लगाएं।
- बाबा को पीले रंग के फूल बहुत प्रिय हैं, उन्हें अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती दिखाएं।
- बाबा को भोग में खिचड़ी, फल या कोई भी पीली मिठाई चढ़ाएं। याद रखें, बाबा को सादगी पसंद थी, इसलिए मन का भाव ज्यादा महत्वपूर्ण है।
- श्रद्धा के साथ साईं व्रत कथा पढ़ें और अंत में उनकी आरती गाएं।
खान-पान और नियम
इस व्रत में भूखा रहने का कड़ा नियम नहीं है। आप फलाहार कर सकते हैं या दिन में एक समय सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। बाबा का सिद्धांत था कि खाली पेट रहकर भक्ति नहीं की जा सकती, इसलिए शरीर को कष्ट देकर व्रत न करें।
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व्रत का उद्यापन
जब आपके संकल्पित गुरुवार (जैसे 9 या 21) पूरे हो जाएं, तो अंतिम गुरुवार को उद्यापन करें। इस दिन गरीबों को भोजन कराएं और सामर्थ्य अनुसार साईं बाबा की छोटी पुस्तकें या तस्वीरें लोगों को बांटें ताकि बाबा की महिमा का प्रसार हो।
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