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    क्या आप भी सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि को एक समझते हैं? अभी जान लें इन दोनों पर्वों के बीच का अंतर

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 07:00 AM (IST)

    यह लेख सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि के बीच के महत्वपूर्ण अंतरों को स्पष्ट करता है। इसमें दोनों पर्वों के महत्व, तिथियों और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं ...और पढ़ें

    सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर (Picture Credits- AI Image)

    सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर (Picture Credits- AI Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में हर महीने में मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को जीवन में सभी सुख मिलते हैं और महादेव की कृपा प्राप्त होती है।

    वैसे शिवरात्रि हर महीने मनाई जाती है, लेकिन महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इन दोनों का महत्व अलग-अलग है। कई लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है।

    सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि के बीच अंतर

    सावन शिवरात्रि- इस पर्व को सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर महादेव के संग मां पार्वती की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसी दिन कांवड़ यात्रा का जल चढ़ाया जाता है।

    महाशिवरात्रि- वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल महाशिवरात्रि के पर्व को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इससे साधक को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

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    सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का महत्व

    पौराणिक कथा के अनुसार, सावन के महीने में अमृत की प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन हुआ था। समुद्र मंथन से विष निकला, जिसको भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने के लिए पी लिया था, जिसकी वजह से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया। इसलिए देवताओं ने विष की जलन को शांत करने के लिए महादेव का जलाभिषेक किया था। इसलिए सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। सावन शिवरात्रि के अवसर पर महादेव का जलाभिषेक करने का विधान है।

    महाशिवरात्रि- पौराणिक कथा के अनुसार,फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी। इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है।

    कब से शुरू होगा सावन?

    वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार सावन के महीने की शुरुआत 30 जुलाई से होगी और समापन 28 अगस्त को समाप्त होगा।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।