शनिदेव को क्यों मिला न्याय के देवता का पद? यहां पढ़ें न्यायाधीश की अनसुनी कथा
सनातन धर्म में शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य देव द्वारा अपमानित होने के बाद शनिदेव ने महादेव की कठोर तपस्या की। ...और पढ़ें

शनिदेव की कथा (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनिदेव की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में आने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है। साथ ही सभी कामों में सफलता मिलती है। शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर कैसे शनिदेव को न्याय का देवता का वरदान प्राप्त हुआ? अगर नहीं पता, तो आइए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।

शनिदेव की कथा (Shani Dev Ki Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, शनिदेव भगवान सूर्य देव और माता छाया के पुत्र हैं। जब शनिदेव का जन्म हुआ, तो उनका रंग काला था। सूर्य देव अपने पुत्र के रंग को देख बेहद क्रोधित हुए। इसके बाद उन्होंने माता छाया से कहा कि वह उनका पुत्र नहीं है। इससे माता का अपमान देखकर शनिदेव को बहुत आघात पहुंचा।
शनिदेव ने माता के अपमान का बदला लेने के लिए और सूर्य देव से अधिक शक्ति की प्राप्ति के लिए महादेव की शरण में पहुचें। इसके बाद उन्होंने शिव जी की तपस्या की। अन्न-जल का त्याग था। शनिदेव की भक्ति से महादेव प्रसन्न हुए और महादेव ने शनिदेव को दर्शन किए। महादेव ने शनिदेव से वरदान मांगने के लिए कहा।
तब शनिदेव ने कहा कि मुझे ऐसा कोई शक्ति मिले, जो उनके पिता से भी श्रेष्ठ हो और वे तीनों लोकों में पूजनीय हों। तब महादेव ने शनिदेव को नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्रदान किया। साथ ही उन्हें तीनों लोकों का दंडाधिकारी नियुक्त किया। शिव जी ने शनिदेव से कहा कि तुम मनुष्यों देवताओं, असुरों, नागों और गंधर्वों के भी न्यायाधीश होगे। इसलिए शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है।
इस तरह करें शनिदेव को प्रसन्न
अगर आप शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद पेड़ की 5 या 7 बार परिक्रमा करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से शनिदेव की कृपा बरसती है और बिगड़े का पूरे होते हैं। साथ ही प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
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