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    Shani Trayodashi 2026: शनि त्रयोदशी पर सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, इन उपायों से बदल जाएगी किस्मत की लकीर

    Updated: Fri, 06 Feb 2026 08:00 PM (IST)

    14 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर शनि प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। शनिवार को पड़ने से इसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत सभी संकटों ...और पढ़ें

    Shani Trayodashi 2026: शनि त्रयोदशी का धार्मिक महत्व

    Shani Trayodashi 2026: शनि त्रयोदशी का धार्मिक महत्व 

    HighLights

    1. मकर राशि के स्वामी न्याय के देवता शनिदेव हैं। 

    2. भगवान शिव की पूजा से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। 

    3. शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित होता है। 

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, 14 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस शुभ अवसर पर फाल्गुन माह का पहला प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। शनिवार के दिन पड़ने के चलते यह शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा।

    Bhagwan Shiv

    शिव पुराण में शनि प्रदोष व्रत की महिमा का वर्णन विस्तारपूर्वक किया गया है। शनि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। साथ ही सुख, सौभाग्य और वंश में वृद्धि होती है। अतः भक्तजन श्रद्धा भाव से प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करते हैं।

    ज्योतिषियों की मानें तो शनि प्रदोष व्रत पर कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में भगवान शिव संग मां पार्वती की पूजा करने से साधक पर शनिदेव की विशेष कृपा बरसेगी।

    शनि त्रयोदशी शुभ योग

    ज्योतिषियों की मानें तो शनि त्रयोदशी पर सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग निशिता काल तक है। इस योग में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। साथ ही घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आएगी।


    पंचांग

    सूर्योदय - सुबह 07 बजकर 04 मिनट पर

    सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 38 मिनट पर

    ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 24 मिनट से 06 बजकर 14 मिनट तक

    विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 47 मिनट से 03 बजकर 33 मिनट तक

    गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 36 मिनट से 07 बजकर 01 मिनट तक

    निशिता मुहूर्त - रात्रि 12 बजकर 26 मिनट से 01 बजकर 16 मिनट तक


    शनि त्रयोदशी उपाय

    शनि प्रदोष व्रत के दिन पूजा के समय भगवान शिव का अभिषेक करें। आप दूध, दही, घी, गंगाजल और सामान्य जल से भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं।

    शनिदेव की कृपा पाने के लिए पूजा के समय भगवान शिव को तिल अर्पित करें। वहीं, काले तिल मिश्रित गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करें। इस उपाय को करने से शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती का प्रभाव कम होगा।

    खबरें और भी

    शनि प्रदोष व्रत के दिन पूजा के बाद काले चीजों का दान करें। आप काले वस्त्र, काले तिल, कंबल और चमड़े के जूते और चप्पल दान कर सकते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।