Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी पर करें ये एक काम, घर में होगा माता लक्ष्मी का वास
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहते हैं, जो इस साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ पड़ रही है। इस दिन भगव ...और पढ़ें

Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी पर करें ये काम।
HighLights
माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है
इस साल यह शुभ तिथि 14 जनवरी को पड़ रही है
इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व भी मनाया जा रहा है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। इस साल यह शुभ तिथि 14 जनवरी को पड़ रही है। वहीं, इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व भी मनाया जा रहा है, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। षटतिला एकादशी के दिन (Shattila Ekadashi 2026 Rituals) भगवान विष्णु की आराधना और 'तिल' के छह प्रयोगों का विधान है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री हरि स्तोत्र का पाठ करने से न केवल व्यक्ति के पापों का नाश होता है, बल्कि घर में स्थाई रूप से सुख-शांति और समृद्धि आती है, तो आइए इस कल्याणकारी स्तोत्र का पाठ करते हैं, जो इस प्रकार हैं -

।। विष्णु शान्ताकारम मंत्र।।
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
॥ श्री हरि स्तोत्र ॥
जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालंशरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं
नभोनीलकायं दुरावारमायंसुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं॥
सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासंजगत्सन्निवासं शतादित्यभासं
गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रंहसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं॥
रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारंजलान्तर्विहारं धराभारहारं
चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपंध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं॥
जराजन्महीनं परानन्दपीनंसमाधानलीनं सदैवानवीनं
जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुंत्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं॥
कृताम्नायगानं खगाधीशयानंविमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं
स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलंनिरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं॥
समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशंजगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं
सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहंसुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं॥
सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठंगुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं
सदा युद्धधीरं महावीरवीरंमहाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं॥
रमावामभागं तलानग्रनागंकृताधीनयागं गतारागरागं
मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतंगुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं॥
॥ फलश्रुति ॥
इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तंपठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारे:
स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकंजराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो॥
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