Sheetala Saptami 2026: शीतला सप्तमी पर करें ये काम, संतान से जुड़ी मुश्किलें होंगी दूर
शीतला सप्तमी (Sheetala Saptami 2026) का पर्व हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है, जो इस साल 10 मार्च 2026 को पड़ेगी। ...और पढ़ें

Sheetala Saptami 2026: श्री शीतला चालीसा का पाठ। (Ai Generated Image)
HighLights
इस साल यह शुभ तिथि 10 मार्च को पड़ रही है
इस दिन माता शीतला की पूजा होती है
इस दिन माताएं विधि-विधान से पूजा और व्रत करती हैं
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Sheetala Saptami 2026: चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शीतला सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। इस साल यह शुभ तिथि 10 मार्च, मंगलवार को पड़ रही है। माता शीतला को आरोग्य और शीतलता की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो माताएं इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करती हैं, उनकी संतान को लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
अगर आप अपनी संतान की अच्छी सेहत, शिक्षा या उसके जीवन में आ रही बाधाओं को लेकर परेशान हैं, तो इस शीतला सप्तमी पर श्री शीतला चालीसा का पाठ करें, जो इस प्रकार हैं -

।।श्री शीतला चालीसा।।
''दोहा''
जय-जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान।
होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धि बल ज्ञान।।
घट घट वासी शीतला शीतल प्रभा तुम्हार।
शीतल छैंय्या शीतल मैंय्या पल ना दार।।
''चौपाई''
जय-जय-जय श्री शीतला भवानी। जय जग जननि सकल गुणधानी।।
गृह-गृह शक्ति तुम्हारी राजित। पूरन शरन चंद्रसा साजती।।
विस्फोटक सी जलत शरीरा। शीतल करत हरत सब पीरा।।
मातु शीतला तव शुभनामा। सबके गाढ़े आवहिं कामा।।
शोकहरी शंकरी भवानी। बाल-प्राणरक्षी सुखदानी।।
शुचि मार्जनी कलश करराजै। मस्तक तेज सूर्य समसाजे।।
चौसठ योगिन संग में गावैं। वीणा ताल मृदंग बजावै।।
नृत्य नाथ भैरो दिखरावैं। सहज शेष शिव पार ना पावैं।।
धन्य-धन्य भात्री महारानी। सुरनर मुनि तब सुयश बखानी।।
ज्वाला रूप महा बलकारी। दैत्य एक विस्फोटक भारी।।
ज्वाला रूप महाबल कारी। दैत्य एक विश्फोटक भारी।।
हर हर प्रविशत कोई दान क्षत। रोग रूप धरी बालक भक्षक।।
हाहाकार मचो जग भारी। सत्यो ना जब कोई संकट कारी।।
तब मैंय्या धरि अद्भुत रूपा। कर गई रिपुसही आंधीनी सूपा।।
विस्फोटक हि पकड़ी करी लीन्हो। मुसल प्रमाण बहु बिधि कीन्हो।।
बहु प्रकार बल बीनती कीन्हा। मैय्या नहीं फल कछु मैं कीन्हा।।
अब नही मातु काहू गृह जै हो। जह अपवित्र वही घर रहि हो।।
पूजन पाठ मातु जब करी है। भय आनंद सकल दुःख हरी है।।
अब भगतन शीतल भय जै हे। विस्फोटक भय घोर न सै हे।।
श्री शीतल ही बचे कल्याना। बचन सत्य भाषे भगवाना।।
कलश शीतलाका करवावै। वृजसे विधीवत पाठ करावै।।
विस्फोटक भय गृह गृह भाई। भजे तेरी सह यही उपाई।।
तुमही शीतला जगकी माता। तुमही पिता जग के सुखदाता।।
तुमही जगका अतिसुख सेवी। नमो नमामी शीतले देवी।।
नमो सूर्य करवी दुख हरणी। नमो नमो जग तारिणी धरणी।।
नमो नमो ग्रहोंके बंदिनी। दुख दारिद्रा निस निखंदिनी।।
श्री शीतला शेखला बहला। गुणकी गुणकी मातृ मंगला।।
मात शीतला तुम धनुधारी। शोभित पंचनाम असवारी।।
राघव खर बैसाख सुनंदन। कर भग दुरवा कंत निकंदन।।
सुनी रत संग शीतला माई। चाही सकल सुख दूर धुराई।।
कलका गन गंगा किछु होई। जाकर मंत्र ना औषधी कोई।।
हेत मातजी का आराधन। और नही है कोई साधन।।
निश्चय मातु शरण जो आवै। निर्भय ईप्सित सो फल पावै।।
कोढी निर्मल काया धारे। अंधा कृत नित दृष्टी विहारे।।
बंधा नारी पुत्रको पावे। जन्म दरिद्र धनी हो जावे।।
सुंदरदास नाम गुण गावत। लक्ष्य मूलको छंद बनावत।।
या दे कोई करे यदी शंका। जग दे मैंय्या काही डंका।।
कहत राम सुंदर प्रभुदासा। तट प्रयागसे पूरब पासा।।
ग्राम तिवारी पूर मम बासा। प्रगरा ग्राम निकट दुर वासा।।
अब विलंब भय मोही पुकारत। मातृ कृपाकी बाट निहारत।।
बड़ा द्वार सब आस लगाई। अब सुधि लेत शीतला माई।।
''दोहा''
यह चालीसा शीतला पाठ करे जो कोय।
सपनें दुख व्यापे नही नित सब मंगल होय।।
बुझे सहस्र विक्रमी शुक्ल भाल भल किंतू।
जग जननी का ये चरित रचित भक्ति रस बिंतू।।
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