Sheetala Saptami 2026: आखिर क्यों शीतला माता को चढ़ाते हैं ठंडा खाना? जानें इसका सही नियम
शीतला सप्तमी (Sheetala Saptami 2026) जिसे बसौड़ा भी कहते हैं। इस दिन शीतला माता की पूजा का विधान है। ...और पढ़ें

Sheetala Saptami 2026: शीतला सप्तमी का महत्व। (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक शीतला सप्तमी (Sheetala Saptami 2026) का पर्व है। चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार को 'बसौड़ा' भी कहा जाता है। इस दिन की सबसे खास बात यह है कि माता शीतला को ताजा नहीं, बल्कि एक दिन पहले बना हुआ बासी और ठंडा भोजन चढ़ाया जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर देवी-देवता को ताजा भोग लगाने की परंपरा के बीच शीतला माता को बासी भोजन क्यों चढ़ाया जाता है? आइए, इसके पीछे का धार्मिक महत्व जानते हैं।

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धार्मिक मान्यता (Sheetala Saptami Significance)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता शीतलता की देवी माना जाता हैं। वह नीम के पत्तों से सजी हैं, हाथ में कलश और झाड़ू धारण करती हैं और उनका वाहन गधा है। धार्मिक दृष्टि से अग्नि को गर्म का प्रतीक माना गया है, जबकि माता का स्वभाव शीतल है। इसलिए, उनके पूजन के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। मान्यता है कि सप्तमी के दिन ताजा भोजन बनाकर उन्हें चढ़ाने से माता रुष्ट हो सकती हैं। इसीलिए एक दिन पहले ही भोजन बना लिया जाता है और सप्तमी के दिन ठंडा भोग (बासौड़ा) लगाकर परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है।
कैसे मनाया जाता है बसौड़ा?
शीतला सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर शीतल यानी ठंडे पानी से स्नान किया जाता है। इसके बाद माता को दही, रबड़ी, चावल, पूरी और चने जैसी ठंडी चीजों का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही घर की महिलाएं माता की पूजा कर घर के मुख्य द्वार पर हल्दी के छापे लगाती हैं और परिवार के लिए अच्छी सेहत की प्रार्थना करती हैं।
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