जिस शिव धनुष के भार से कांपता था हर कोई, उसे श्रीराम ने एक झटके में कैसे तोड़ दिया?
भगवान शिव का शक्तिशाली 'पिनाक' धनुष राजा जनक के पास कैसे पहुंचा और भगवान राम ने इसे कैसे तोड़ा? यहां पढ़ें शिव धनुष की पूरी कथा। ...और पढ़ें

शिव का अजेय अस्त्र 'पिनाक'

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि सीता स्वयंवर में जिस धनुष को बड़े-बड़े महारथी हिला तक नहीं पाए, उसका रहस्य क्या था? वह कोई साधारण हथियार नहीं, बल्कि भगवान शिव का दिव्य धनुष 'पिनाक' था। देवशिल्पी विश्वकर्मा द्वारा निर्मित इस धनुष में साक्षात महादेव की असीम ऊर्जा समाहित थी।
माना जाता है कि इसकी टंकार मात्र से तीनों लोक कांप उठते थे। साथ ही, इसका वजन इतना अधिक था कि बड़े-बड़े देवता भी इसे उठाने का साहस नहीं कर पाते थे।
राजा जनक के पास कैसे पहुंचा पिनाक?
अक्सर यह सवाल उठता है कि शिव का यह अस्त्र मिथिला नरेश के पास कैसे आया। इसका स्पष्ट वर्णन महर्षि वाल्मीकि कृत 'रामायण' (बाल कांड) में मिलता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, यह दिव्य धनुष देवताओं द्वारा राजा जनक के पूर्वज 'राजा देवरात' को एक धरोहर के रूप में सौंपा गया था। तब से ही पिनाक धनुष जनक वंश की सबसे अमूल्य और पवित्र विरासत बन गया, जिसकी मिथिला में नियमित रूप से पूजा की जाती थी।
सीता जी और पिनाक का संबंध
कथा में नया मोड़ तब आता है जब बचपन में एक दिन माता सीता इस भारी-भरकम धनुष को खेल-खेल में बड़ी सहजता से उठा लेती हैं। यह अद्भुत दृश्य देखकर राजा जनक चकित रह जाते हैं। वे समझ जाते हैं कि सीता कोई साधारण कन्या नहीं हैं, बल्कि कोई दैवीय शक्ति हैं। उसी दिन उन्होंने यह कठोर प्रण लिया कि जो भी असाधारण वीर शिव के इस पिनाक धनुष पर प्रत्यंचा (डोरी) चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता का विवाह संपन्न होगा।
धनुष भंग: श्रीरामचरितमानस का सबसे बड़ा प्रसंग
सीता स्वयंवर और धनुष टूटने का सबसे सजीव एवं विस्तारपूर्ण वर्णन गोस्वामी तुलसीदास कृत 'श्रीरामचरितमानस' (बाल कांड - धनुष यज्ञ प्रसंग) में मिलता है। शर्त के अनुसार कई अभिमानी राजाओं ने अपनी पूरी ताकत लगाई, लेकिन पिनाक अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ। अंततः गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम मंच पर आए।
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रामचरितमानस के अनुसार, श्रीराम ने अत्यंत विनम्रता और सहज भाव से धनुष को उठाया। जैसे ही उन्होंने उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए उसे झुकाया, वह भयंकर ध्वनि (आवाज) के साथ बीच से टूट गया। इस ऐतिहासिक घटना को "धनुष भंग" कहा जाता है, जिसने राम और सीता के विवाह का मार्ग प्रशस्त किया।
अहंकार के अंत का प्रतीक
पिनाक का टूटना केवल एक अस्त्र का खंडन नहीं था। धार्मिक दृष्टिकोण से इसे अहंकार और घमंड के टूटने का प्रतीक माना जाता है। यह प्रसंग संदेश देता है कि ईश्वर की प्राप्ति या बड़े लक्ष्यों की सिद्धि बल और अभिमान से नहीं, बल्कि श्रीराम जैसी विनम्रता और शालीनता से ही संभव है।
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