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    Shukra Pradosh Vrat 2026: सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए महिलाएं भूलकर भी न करें ये गलतियां

    Updated: Fri, 30 Jan 2026 01:00 PM (IST)

    Shukra Pradosh Vrat 2026 Rituals: शुक्र प्रदोष का व्रत श्रद्धा और नियमों के पालन का नाम है। अगर महिलाएं इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो महादेव की ...और पढ़ें

    Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत 2026 (Image Source: AI-Generated)

    Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत 2026 (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का विशेष महत्व है, खासकर जब यह शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे 'शुक्र प्रदोष' (Shukra Padosha) कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के साथ-साथ भौतिक सुखों के कारक शुक्र देव को प्रसन्न करने के लिए भी उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य का आगमन होता है। लेकिन, अनजाने में की गई कुछ गलतियां इस पुण्य फल को कम कर सकती हैं।

    प्रदोष व्रत और सावधानियां

    शुक्र प्रदोष का व्रत मुख्य रूप से अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है। धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में शिव जी की पूजा करना सबसे अधिक फलदायी होता है। लेकिन, महिलाओं के लिए इस व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना जरूरी बताया गया है।

    Shrukra Vart

    (Image Source: AI-Generated)

    इन गलतियों से बचें (सावधानियां)

    1. क्रोध और विवाद से दूरी: शास्त्रों में बताया गया है कि व्रत के दिन मन शांत रहना चाहिए। विशेषकर महिलाओं को इस दिन किसी से कटु वचन नहीं बोलने चाहिए और न ही घर में झगड़ा करना चाहिए। क्रोध करने से व्रत की सात्विक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।

    2. काले वस्त्रों का त्याग: शुक्र प्रदोष के दिन गहरे या काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। ज्योतिषीय विशेषज्ञों के अनुसार, काला रंग नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लाल, गुलाबी या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है, जो सकारात्मकता और सौभाग्य को बढ़ाते हैं।

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    3. शिवलिंग को स्पर्श करने के नियम: पूजा के दौरान माताएं और बहनें अक्सर भावुक होकर शिवलिंग को स्पर्श करती हैं। हालांकि शिव सबके हैं, लेकिन मंदिरों की मर्यादा और परंपराओं के अनुसार, महिलाओं को शिवलिंग को सीधे स्पर्श करने के बजाय जल चढ़ाकर या दूर से प्रणाम करके पूजा करनी चाहिए। माता पार्वती की पूजा करना महिलाओं के लिए विशेष फलदायी होता है।

    4. तामसिक भोजन से बचें: व्रत के दिन घर में लहसुन, प्याज या मांसाहार का प्रयोग बिल्कुल न करें। यहां तक कि जो सदस्य व्रत नहीं रख रहे हैं, उन्हें भी सादा भोजन ही करना चाहिए ताकि घर की शुद्धता बनी रहे।

    प्रदोष काल का महत्व

    धार्मिक जानकारों का मानना है कि प्रदोष काल में महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय किया गया दान और पाठ दरिद्रता का नाश करता है। महिलाओं को शाम के समय घी का दीपक जलाकर 'ओम नमः शिवाय' का जाप जरूर करना चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।