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    क्या आप जानते हैं सीता नवमी व्रत के अद्भुत लाभ? सुहागिन महिलाएं इस मुहूर्त में करें पूजा

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 10:00 AM (GMT+05:30)

    पंचांग के अनुसार, हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी मनाई जाती है। इसे जानकी नवमी भी कहते हैं। ...और पढ़ें

    जानें सुहागिनों के लिए सीता नवमी व्रत के अद्भुत लाभ (Picture Credit- AI Generated)

    जानें सुहागिनों के लिए सीता नवमी व्रत के अद्भुत लाभ (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है सीता नवमी

    2. सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं व्रत

    3. इस दिन पूजा से संतान सुख की भी प्राप्ति हो सकती है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैशाख माह में मनाई जाने वाली सीता नवमी को माता सीता के जन्म की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। 2026 में यह पर्व 25 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह तिथि सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति कि लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं। चलिए पढ़ते हैं विवाहित महिलाओं के लिए सीता नवमी व्रत करने का क्या लाभ है।

    सीता नवमी पूजा मुहूर्त

    वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 24 अप्रैल को शाम 7 बजकर 21 मिनट पर हो रही है। वहीं अगर इस तिथि के समापन की बात की जाए, तो यह तिथि 25 अप्रैल को शाम 6 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए सीता नवमी का पर्व शनिवार 25 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन पर पूजा का मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहने वाला है -

    • सीता नवमी मध्याह्न मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 1 मिनट से दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक
    • सीता नवमी मध्याह्न का क्षण - दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर
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     (Picture Credit- AI Generated)

    सीता नवमी के प्रमुख लाभ

    सीता नवमी पर विवाहित महिलाओं द्वारा व्रत रखने से उन्हें अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है। माना जाता है कि इस दिन पर पूरे विधि-विधान से माता सीता और भगवान राम की पूजा करने से घर में प्रेम बढ़ता है। साथ ही निसंतान दंपत्ति के लिए भी सीता नवमी का व्रत काफी महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को संतान सुख की भी प्राप्ति होती है।

    जरूर करें ये काम

    अखंड सौभाग्य की प्राप्ति व वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए सीता नवमी पर माता सीता को 16 शृंगार की सामग्री के साथ-साथ लाल चुनरी अर्पित करें। इससे आपसी प्रेम बढ़ता है। इसके साथ ही पूजा में 'ॐ पतिव्रतायै नमः' मंत्र का जप करें। इससे दाम्पत्य जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। आप इस दिन पर कन्याओं को भोजन भी करवा सकते हैं। इससे साधक को माता सीता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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    (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    करें इन मंत्रों का जप

    1. "ॐ सीतायै नमः"
    2. "श्री जानकी रामाभ्यां नमः"
    3. मूल मंत्र - श्री सीतायै नमः।
    4. बीज मंत्र - "ॐ श्री सीता रामाय नमः"
    5. गायत्री मंत्र - "ॐ जनकाय विद्महे राम प्रियाय धीमहि। तन्नो सीता प्रचोदयात्॥"
    6. श्री जानकी रामाभ्यां नमः ।।
    7. ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे रामवल्लभायै धीमहि । तन्न: सीता प्रचोदयात् ।।

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