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    क्या सच में बाली से कमजोर थे सुग्रीव? वाल्मीकि रामायण में दर्ज है उनके बाहुबल का असली प्रमाण

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 11:30 AM (IST)

    सुग्रीव रामायण के एक प्रमुख और शक्तिशाली पात्र थे, जो सूर्य देव के पुत्र और बाली के भाई थे। वे कुशल योद्धा, सेनापति और भगवान राम के महत्वपूर्ण सहयोगी ...और पढ़ें

    सुग्रीव की ताकत का रहस्य (AI Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण काल में सुग्रीव सबसे प्रमुख पात्रों में शामिल था। सुग्रीव के भाई का नाम बाली था, जो देवराज इंद्र का पुत्र था। वही सुग्रीव के पिता सूर्य देव थे। भले ही दोनों की माताएं एक थी, लेकिन दोनों भाई के पिता अलग-अलग थे। जब दोनों भाई दुंदुंभी के मायावी भाई को मारने निकले तब मायावी राक्षस एक गुफा में प्रवेश कर गया। बाली ने सुग्रीव से कहा तुम मेरा गुफा के बाहर इंतजार करो, मैं उस दैत्य को मारकर आता हूं।

    बाली का इंतजार करते करते गुफा के बाहर सुग्रीव को एक साल बीत गए। जब एक साल बाद भी बाली गुफा से बाहर नहीं निकला तो सुग्रीव बैचेन हो गया। तभी गुफा के अंदर से एक आवाज आने के साथ गुफा से खून निकलने लगा। सुग्रीव ने सोचा बाली मारा जा चुका है इसलिए उसने गुफा के मुंह को बड़े पत्थर से बंद कर दिया। इस घटना के कारण बाली को अपने भाई के प्रति गलतफहमी हो गई। उसने सुग्रीव को राज्य से बाहर निकाल दिया।

    बहुत से लोगों को लगता है कि, बाली के बल के आगे सुग्रीव कुछ नहीं था। आज के इस लेख में हम जानेंगे अपने भाई की ही तरह सुग्रीव भी अति बलशाली था।

    वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, सुग्रीव सबसे शक्तिशाली वानर योद्धाओं में से एक होने के साथ असाधारण राजा था। हालांकि शारीरिक बल में भले ही हनुमान जी और बाली उनसे आगे थे, फिर भी सुग्रीव को हरा पाना अच्छे-अच्छे योद्धाओं के लिए मुश्किल कार्य था। सुग्रीव कुशल योद्धा होने के साथ बेहतर सेनापति और लंका विजय करने में भगवान श्रीराम का अत्यंत महत्वपूर्ण सहयोगी था।

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    सुग्रीव इन कारणों से शक्तिशाली था।

    वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, श्री राम के प्रति उनकी वफादारी, साहस और नेतृत्व क्षमता ने सुग्रीव को रावण की हार में सबसे अहम योगदान देने वालों में से एक बना दिया।

    सुग्रीव सबसे ताकतवर वानर योद्धाओं में से एक थे और किष्किंधा के असली राजा भी थे। लंका के खिलाफ युद्ध के दौरान लाखों वानरों की कमान संभाली थी।

    अपने भाई बाली की ही तरह सुग्रीव के पास भी जबरदस्त शक्तियां थी। वह लड़ाई में बड़े-बड़े योद्धाओं को हराने की क्षमता रखते थे। इसके अलावा बड़े-बड़े पत्थरों को फेंकने की भी ताकत थी।

    सुग्रीव हाथ की लड़ाई और कुश्ती में भी माहिर थे, और हथियारों के बजाय अपनी ताकत और फुर्ती पर यकीन रखते थे।

    वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, लंका युद्ध के दौरान सुग्रीव ने हिम्मत से रावण पर हमला किया और उससे सीधी लड़ाई की फिर भी सुरक्षित रूप से श्रीराम के पास लौट आए।

    सुग्रीव ने लंका युद्ध के दौरान कुंभकर्ण के ताकतवर बेटे कुंभ को मार डाला, जो युद्ध में उसकी सबसे बड़ी कामयाबी थी।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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