क्या वाल्मीकि रामायण में है 'लक्ष्मण रेखा' का जिक्र? पढ़िए रामायण के 4 बड़े मिथक
रामायण से जुड़े कुछ प्रचलित मिथकों की सच्चाई उजागर करता है। इसमें हनुमान जी की गदा, लक्ष्मण रेखा, सीता के रावण की बेटी होने और गिलहरी के निशान जैसे वि ...और पढ़ें

रामायण से जुड़ी अनसुनी सच्चाई (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म साहित्य के दो अत्यंत प्रमुख महाकाव्य रामायण और महाभारत, जो सदियों बाद भी अपनी जीवंत कहानियों के लिए प्रचलित है। रामायण महाकाव्य जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
हमनें रामायण की कहानियों को किताबों, टीवी सीरियल्स और लोक कथाओं के माध्यम से काफी पढ़ा और सुना होगा, लेकिन इस महाकाव्य से जुड़ी कुछ ऐसे भी मिथक हैं, जो काफी प्रचलित हैं। आइए जानते हैं रामायण के इन मिथकों के बारे में।
मिथक- हनुमान जी हमेशा गदा रखते थे
सच्चाई- वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रामायणकाल में युद्ध के दौरान हनुमान जी गदा अस्त्र के साथ तो लड़े ही थे, लेकिन वह हस्त युद्ध में भी काफी माहिर थे। वह अपने हाथों से ही राक्षसों को कुचलते थे।
मिथक- लक्ष्मण ने खींची दिव्य रेखा
सच्चाई- हममें से ज्यादातर लोग सालों से इस बात पर भरोसा करते आए हैं कि, जब लक्ष्मण जी भगवान राम की आवाज के पीछे भागे उससे पहले उन्होंने कुटिया के बाहर रेखा खींच दी, जिसे लक्ष्मण रेखा कहा जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि, वाल्मीकि जी ने इस दिव्य रेखा का कहीं भी जिक्र नहीं किया है। माता सीता सिर्फ नेक नीयत के साथ भिक्षा देने के लिए बाहर निकली थीं।
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क्या सीता माता रावण की बेटी थी?
कई प्रचलित कहानियों में सीता माता को रावण की बेटी बताया जाता है। कुछ पौराणिक कहानियों के मुताबिक, रावण ने कई ऋषियों का वध करके उनके खून से घड़ा भर लिया। तब ऋषि ने उन्हें श्राप दिया कि, इस खून से एक कन्या का जन्म होगा जो तेरी मौत की वजह बनेगी।
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कहा जाता है कि, रावण ने उस मटके को लंका से दूर मिथिला के पास खेतों में गढ़वा दिया था, जहां से बाद में माता सीता मिली थीं। लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि, वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में ऐसी किसी भी घटना का उल्लेख नहीं किया गया है।
गिलहरी की पीठ पर राम जी के तीन अंगुलियों के निशान
सीताहरण के बाद जब राम जी अपनी सेना के साथ समुद्र किनारे पहुंचे तो आगे जाने के लिए रामसेतु बनाया गया था, जिसमें एक गिलहरी की भागीदारी को देखते हुए भगवान राम ने उसकी पीठ पर तीन अंगुलियां फेरी।
जबकि वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में ऐसी किसी भी घटना का जिक्र नहीं किया गया है।
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