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    सुंदरकांड का पाठ करते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां? रूठ सकते हैं हनुमान जी

    Updated: Fri, 05 Jun 2026 06:00 PM (IST)

    हनुमान जी की कृपा और हर संकट से मुक्ति पाने के लिए सुंदरकांड का पाठ अचूक माना जाता है। ...और पढ़ें

    सुंदरकांड पाठ के नियम और सावधानियां।

    सुंदरकांड पाठ के नियम और सावधानियां।

    HighLights

    1. सुंदरकांड का पाठ करने से पहले तन और मन की शुद्धि सबसे जरूरी है

    2. पाठ को बीच में अधूरा छोड़ना या बार-बार जगह बदलना वर्जित माना गया है


    3. पाठ के दिनों में तामसिक भोजन से दूरी बनाना आवश्यक है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामचरितमानस का पांचवां अध्याय सुंदरकांड हनुमान जी की महिमा, उनके साहस और बुद्धि का अद्भुत वर्णन है। मान्यता है कि जहां भी सुंदरकांड का पाठ पूरी श्रद्धा से होता है, वहां हनुमान जी खुद किसी न किसी रूप में मौजूद रहते हैं। यह पाठ जीवन के बड़े से बड़े संकट को टालने और आत्मविश्वास जगाने की शक्ति रखता है।

    हालांकि, कई बार लोग पूरी श्रद्धा के बाद भी मनचाहा फल नहीं पाते, जिसका मुख्य कारण पाठ के दौरान होने वाली कुछ अनजानी गलतियां हैं। क्या आप जानते हैं कि अनजाने में की गई कुछ गलतियां इसके पुण्य फल को खत्म कर सकती हैं?

    तो आइए यहां जानते हैं कि सुंदरकांड पाठ के दौरान किन नियमों का पालन करना जरूरी है और किन गलतियों से बचना चाहिए? ताकि पवनपुत्र हनुमान की कृपा आप पर हमेशा बनी रहे।

    इन गलतियों से बचें

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    अपवित्रता और सूतक का ध्यान न रखना

    हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं और उन्हें पवित्र बहुत प्रिय है। पाठ शुरू करने से पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। अगर परिवार में सूतक (किसी के जन्म या मरण का समय) लगा हो, तो सुंदरकांड का पाठ न करें।

    आसन और स्थान का बार-बार बदलना

    पाठ शुरू करने से पहले एक शांत स्थान चुनें और कुशा या ऊनी आसन पर बैठें। पाठ के बीच में उठना, इधर-उधर देखना या किसी से बात करना वर्जित है। ऐसा करने से एकाग्रता भंग होती है और पाठ का आध्यात्मिक प्रभाव समाप्त हो जाता है।

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    बीच में पाठ अधूरा छोड़ना

    सुंदरकांड को एक ही बैठक में पूरा करना चाहिए। कई लोग समय की कमी के कारण आधा पाठ आज और आधा कल करते हैं, जो कि सही नहीं है। अगर समय कम हो, तो आप हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ कर सकते हैं, लेकिन सुंदरकांड को बीच में अधूरा न छोड़ें।

    तामसिक भोजन और आचरण

    अगर आप नियमित सुंदरकांड करते हैं या शनिवार/मंगलवार को इसका संकल्प लेते हैं, तो उस दिन घर में मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का प्रयोग बिल्कुल न करें। इसके साथ ही मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, क्रोध या अपशब्द लाने से बचें।

    आरती और भोग को नजरअंदाज करना

    पाठ समाप्त होने के बाद श्री राम जी और हनुमान जी की आरती करना अनिवार्य है। इसके बाद उन्हें बूंदी के लड्डू, चना-चिरौंजी या फल का भोग लगाएं। बिना आरती और प्रसाद के सुंदरकांड का पाठ पूरा नहीं माना जाता।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।