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    सूतक और पातक: जन्म या मृत्यु के बाद कितने दिन बंद रखें पूजा-पाठ? भूलकर भी न करें ये गलती

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 10:49 AM (GMT+05:30)

    हिंदू धर्म में सूतक और पातक जन्म या मृत्यु के बाद की अशुद्धि की अवधि है, जिसमें पूजा-पाठ वर्जित होता है। सूतक 10-12 दिन और पातक 13 दिन का होता है, जिस ...और पढ़ें

    क्या होता है सूतक और पातक? (Picture Credit: AI Generated)

    क्या होता है सूतक और पातक? (Picture Credit: AI Generated)

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    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म शास्त्रों में सूतक और पातक को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि के दौरान , पूजा, मंदिर और शुभ कार्यों में जाने की मनाही है। सूतक काल के समय को अशुभ माना जाता है। यह जन्म और मृत्यु के बाद कुछ दिनों तक रहता है, जिसे सूतक कहा जाता है।

    सूतक और पातक के शुद्धिकरण के लिए घर में गंगाजल का छिड़काव और हवन किया जाता है। इसके बाद परिवार के सदस्य पूजा-पाठ कर सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि जन्म या घर में किसी की मृत्यु के बाद कितने दिनों तक नहीं करनी चाहिए पूजा। ऐसे में आइए आपको बताते हैं इसके बारे में।

    क्या होता है सूतक?

    जब घर में किसी बच्चे का जन्म होता है, तो सूतक काल लग जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ और मांगलिक कार्य भूलकर भी नहीं करने चाहिए। सूतक काल की अवधि 10 से 12 दिन तक रहती है। इसके बाद नामकरण संस्कार और घर में गंगाजल छिड़क कर शुद्धिकरण जरूर करना चाहिए।

    क्या होता है पातक

    जब परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो जो अशुद्धि लगती है, उसे पातक नाम से जाना जाता है। इसे मृत्यु सूतक भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में पातक की अवधि मृत्यु के दिन से लेकर 13 दिनों तक मानी जाती है। मृत्यु के 13वें दिन मृतक की आत्मा की शांति के लिए हवन और ब्राह्मण भोज करवाया जाता है, जिसके बाद घर शुद्ध हो जाता है।

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    कब करें पूजा?

    सूतक काल 10 से 12 दिन तक होता है और पातक की अवधि 13 दिन की होती है। जब हवन और घर का शुद्धिकरण किया जाता है, तो इसके बाद पूजा-पाठ किया जा सकता है।

    Sutak & Patak (1)

    (Picture Credit: AI Generated)

    सूतक और पातक से जुड़े नियम

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूतक और पातक की अवधि के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। ऐसा न करने से जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सूतक और पातक का वर्णन मनुस्मृति और गरुड़ पुराण में मिलता है। 

    भूलकर भी न करें ये काम

    • सूतक और पातक के समय भगवान की मूर्तियों को स्पर्श वर्जित नहीं करना चाहिए।
    • इसके अलावा पूजा-पाठ न करें। साथ ही दीप और अगरबत्ती भूलकर भी न जलाएं।
    • मंदिर के पट को बंद रखना चाहिए।
    • किसी भी शुभ काम में हिस्सा नहीं लेना चाहिए।
    • तुलसी के पौधे को नहीं छूना चाहिए।

    कौन सा से काम कर सकते हैं?

    • इस दौरान मन ही मन में अपने इष्ट देव का ध्यान कर सकते हैं।
    • मन ही मन में मंत्रों का जप करना चाहिए।
    • किसी जरूरी काम को करने से पहले स्नान करना चाहिए।
    • सुबह उठकर आप सूर्य देव की ओर मुख करके उन्हें प्रणाम कर सकते हैं।
    • इसके अलावा पातक के दौरान मृतक की आत्मा की शांति की प्राप्ति के लिए भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।