किसी भी ग्रहण के दौरान तुलसी की पत्तियां तोड़नी चाहिए या नहीं? पुराणों के अनुसार क्या हैं नियम
सनातन धर्म में तुलसी को पवित्र माना जाता है और ग्रहण के दौरान इसके पत्ते तोड़ने के कुछ विशेष नियम हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण, रविवार और ए ...और पढ़ें

ग्रहण में तुलसी तोड़ने के नियम: जानें धार्मिक मान्यताएं और सही तरीका (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। हर घर में एक न एक तुलसी का पौधा जरूर होता है और उसकी पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी को माता लक्ष्मी का ही स्वरूप माना जाता है और भगवान विष्णु की प्रिया कहा जाता है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु को जो भोग लगाया जाता है वो उन्हें तभी स्वीकार्य होता है जब उसमें तुलसी की पत्ती रखी जाती है। किसी भी पूजा-पाठ या हवन और यज्ञ में तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं इस पौधे को लेकर कुछ नियम भी बनाए गए हैं जिनका पालन अत्यंत जरूरी माना जाता है और ऐसा कहा जाता है कि इन नियमों का पालन न करने से विष्णु जी की पूजा का फल नहीं मिलता है।
इन्हीं में से एक है कुछ विशेष दिनों में तुलसी की पत्तियां न तोड़ना। आमतौर पर रविवार और एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ने से मना किया जाता है। वहीं किसी भी ग्रहण के दौरान भी तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए। आइए आपको बताते हैं ग्रहण के दौरान तुलसी की पत्तियां तोड़ना सही है या गलत?
ग्रहण के दौरान तुलसी की पत्तियां तोड़नी चाहिए या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी ग्रहण के दौरान तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए। यही नहीं इस दौरान किसी भी पूजा-पाठ की भी मनाही होती है और ऐसा कहा जाता है कि तुलसी की भी पूजा होती है, इस वजह से ग्रहण में इसे तोड़ने से मना किया जाता है।
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ग्रहण काल में वातावरण की ऊर्जा सामान्य की तुलना में अलग होती है और इस दौरान कई शुभ काम जैसे पूजा-पाठ, भोजन और पौधों का स्पर्श करना मना होता है। इसी वजह से इस दौरान तुलसी की पत्तियों का स्पर्श या इन्हें तोड़ने से भी मना किया जाता है। यही नहीं ग्रहण से पहले ही सूतक काल लग जाता है और इसी समय से तुलसी की पत्तियां तोड़ने से मना किया जाता है।
ग्रहण से पहले भोजन में क्यों डाली जाती है तुलसी की पत्ती
हिंदू परंपरा में ऐसा माना जाता है कि किसी भी भोजन में यदि ग्रहण के दौरान तुलसी दल डाल दिया जाता है तो उसके किसी भी नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।
इस दौरान मुख्य रूप से पहले बने हुए भोजन, दूध, दही, पानी या अन्य खाद्य पदार्थों में तुलसी की पत्तियां डालने से भोजन की शुद्धता बनी रहती है, लेकिन इन पत्तियों को ग्रहण से पहले सूतक लगने से पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए।
तुलसी से जुड़े नियम क्या हैं?
तुलसी के पौधे से जुड़े नियमों में से एक है इसे रविवार और एकादशी तिथि पर न तोड़ना। मान्यता है कि किसी भी एकादशी तिथि के दौरान तुलसी माता भी विष्णु जी के लिए निर्जला उपवास करती हैं। इसी वजह से एकादशी व्रत के दिन भूलकर भी तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए।
आप जब भी तुलसी की पत्तियां तोड़ रहे हों इस बात का ध्यान जरूर रखें कि बिना स्नान किए हुए पौधे का स्पर्श न करें। तुलसी को माता लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है, इसी वजह से इसे हमेशा स्पर्श करने से पहले शुध्दता बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
ग्रहण के दौरान भगवान के मंत्रों का जाप, भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है, लेकिन पूजा-पाठ के साथ तुलसी के पौधे के स्पर्श को भी नियम के अनुकूल नहीं माना जाता है। हालांकि, किसी भी ग्रहण के समापन के बाद स्नान करके आप तुलसी की पत्तियां तोड़ कसते हैं।
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