Sutak Rules: क्या सूतक काल में खाना चाहिए या नहीं? जानें शास्त्रों के कड़े नियम और छूट
3 मार्च को चंद्र ग्रहण के सूतक काल में भोजन पकाना या खाना सही है? जानें गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बीमारों के लिए शास्त्रों में क्या छूट है। ...और पढ़ें

सूतक काल के नियम (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेक्स, नई दिल्ली। साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) आज यानी 3 मार्च को लग रहा है। जो होली के त्योहार के आसपास होने के कारण ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रहण के साथ ही सबसे बड़ा सवाल जो लोगों के मन में आता है, वह है खाने-पीने का नियम। क्या सूतक लगते ही खाना छोड़ देना चाहिए? क्या बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यही नियम हैं? आइए, शास्त्रों के अनुसार इन सवालों के जवाब जानते हैं।
सूतक काल का समय और महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से ठीक 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। आज लगने वाले ग्रहण के लिए सूतक सुबह से ही प्रभावी हो गया है (कुछ पंचांगों के अनुसार सुबह 6:20 बजे से)। शास्त्रों में सूतक को एक संवेदनशील समय माना गया है, जिसमें वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का प्रवाह बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
भोजन को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र?
शास्त्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सूतक काल (Sutak Kaal) शुरू होते ही भोजन पकाना और खाना दोनों वर्जित हैं।
नकारात्मकता का प्रभाव: मान्यता है कि ग्रहण और सूतक के दौरान वातावरण में मौजूद कीटाणु और नकारात्मक ऊर्जा भोजन को दूषित कर देती है।

(Image Source: AI-Generated)
पाचन पर असर: इस समय खाया गया भोजन पचने में भारी होता है और सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए स्वस्थ व्यक्तियों को इस दौरान उपवास रखना चाहिए।
किन लोगों को मिलती है छूट? (Exceptions)
हालांकि, शास्त्रों में कठोर नियमों के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण भी रखा गया है। सूतक के नियम हर किसी पर समान रूप से लागू नहीं होते। कुछ विशेष परिस्थितियों में भोजन करने की छूट दी गई है:
बच्चे: छोटे बच्चों को भूख बर्दाश्त नहीं होती, इसलिए उन्हें सूतक के दौरान खाना खिलाया जा सकता है।
वृद्ध (बुजुर्ग): घर के बुजुर्ग, जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं और दवाइयां लेते हैं, वे भी फलाहार या हल्का भोजन ले सकते हैं।
रोगी (Sick People): जो लोग बीमार हैं या किसी उपचार पर हैं, उनके लिए सूतक के नियम शिथिल रहते हैं। वे अपनी दवा और पथ्य भोजन ले सकते हैं।
प्रेग्नेंट महिलाएं: सूतक और ग्रहण में प्रेग्नेंट औरतों को भी खाना खाने की छूट होती है।
इन लोगों के लिए भी ग्रहण के समाप्त होने तक भारी भोजन से बचने की सलाह दी जाती है।
तुलसी दल: भोजन को सुरक्षित रखने का उपाय
अगर आपके घर में पहले से पका हुआ भोजन, दूध, दही या पानी रखा है, तो उसे फेंकने की जरूरत नहीं है। सूतक शुरू होने से पहले इन चीजों में तुलसी के पत्ते (तुलसी दल) या कुशा घास डाल दें।
खबरें और भी
मान्यता है कि तुलसी में पारा (Mercury) होता है और इसमें अद्भुत शुद्धिकरण क्षमता होती है, जो ग्रहण की नकारात्मक किरणों को भोजन पर असर नहीं करने देती। ध्यान रहे, ग्रहण के बाद ताजा भोजन पकाना ही सबसे उत्तम माना गया है।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।