ग्रहण के दौरान घर में रखी खाने-पीने की चीजों में 'तुलसी' क्यों डाली जाती है?
आयुर्वेद और शास्त्रों में तुलसी को 'संजीवनी' की तरह माना गया है, जो भोजन को दूषित होने से बचाती है। जानें क्यों ग्रहण के दौरान इसे इस्तेमाल करते हैं। ...और पढ़ें

ग्रहण के दौरान क्यों होता है तुलसी का इस्तेमाल (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेक्स, नई दिल्ली। जैसे ही टीवी या अखबारों में सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) की खबर आती है, हमारे घरों में एक अलग ही गहमागहमी शुरू हो जाती है। बड़े-बुजुर्ग फौरन रसोई की ओर भागते हैं और दूध, दही, घी और पानी जैसे खाने-पीने के सामानों में तुलसी के पत्ते डालना शुरू कर देते हैं।
बचपन में हमें लगता था कि यह शायद कोई टोटका है, लेकिन इस एक छोटे से पत्ते के पीछे विज्ञान और अध्यात्म का एक बड़ा रहस्य छिपा है।
क्यों 'अपवित्र' हो जाता है खाना?
ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के दौरान सूर्य या चंद्रमा से आने वाली किरणों में रुकावट आती है। इसकी वजह से पृथ्वी के वातावरण में हानिकारक UV Rays का प्रभाव बढ़ जाता है। रोशनी कम होने और तापमान में बदलाव आने के कारण हवा में सूक्ष्म कीटाणु और बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। ऐसे में पका हुआ भोजन इन बैक्टीरिया की चपेट में आकर जल्दी खराब या 'जहरीला' हो सकता है।
तुलसी का पत्ता कैसे करता है बचाव?
- अब सवाल यह है कि तुलसी ही क्यों? आयुर्वेद और वनस्पति विज्ञान के के अनुसार, तुलसी का पौधा कुदरत का दिया हुआ एक बेहतरीन एंटी-बायोटिक (Anti-Biotic) है। तुलसी के पत्तों में खास तरह के विद्युत तत्व और मरकरी (पारा) पाया जाता है।
- तुलसी में एंटी-रेडिएशन गुण होते हैं। यानी यह अपने आस-पास की हानिकारक किरणों और नकारात्मक तरंगों को सोखने की क्षमता रखती है।
- जब हम खाने में तुलसी का पत्ता डालते हैं, तो वह भोजन के चारों ओर एक 'रक्षा कवच' बना देता है। यह पत्ता वातावरण के दूषित कणों को भोजन में मिलने से रोकता है, जिससे खाने की शुद्धता और उसके पोषक तत्व बरकरार रहते हैं।
- धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों के मुताबिक, तुलसी को सबसे पवित्र माना गया है, जो किसी भी प्रकार की अशुद्धि को दूर करने में सक्षम है।
तुलसी ही क्यों?

(Image Source: AI-Generated)
वनस्पति विज्ञान और आयुर्वेद के अनुसार, तुलसी को 'क्वीन ऑफ हर्ब्स' कहा गया है। खाने में तुलसी डालने के पीछे ये प्रमुख वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तर्क दिए जाते हैं:
नेचुरल एंटी-बायोटिक: तुलसी के पत्तों में भरपूर मात्रा में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह वातावरण के हानिकारक बैक्टीरिया को खाने तक पहुंचने से रोकता है।
एंटी-रेडिएशन शील्ड: विज्ञान मानता है कि तुलसी में पारा (Mercury) और खास तरह के विद्युत तत्व होते हैं। यह ग्रहण के दौरान निकलने वाले हानिकारक विकिरण (Radiation) को सोखने की क्षमता रखती है।
पोषक तत्वों की सुरक्षा: ग्रहण के समय भोजन की आणविक संरचना (Molecular Structure) बिगड़ने लगती है। तुलसी का पत्ता एक 'स्टेबलाइजर' की तरह काम करता है और खाने के पोषक तत्वों को नष्ट होने से बचाता है।
शुद्धिकरण की शक्ति: शास्त्रों में तुलसी को शुद्ध माना गया है। इसकी गंध और प्रभाव से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) खत्म होती है और भोजन सात्विक बना रहता है।
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